द जन सभा | निरंजन
झारखंड की राजधानी रांची स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान, कांके में ‘इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी’ की पहली आधिकारिक बैठक आयोजित की गई। भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग से निबंधन (रजिस्ट्रेशन) मिलने के बाद यह इस समिति की पहली उच्च स्तरीय बैठक थी। रिम्स (RIMS) के निदेशक डॉ. राजकुमार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में संस्थान में होने वाले शोध कार्यों की गुणवत्ता और नैतिक मानकों (ethical standards) की बारीकी से समीक्षा की गई। गहन विचार-विमर्श के बाद समिति ने सीआईपी के मनोचिकित्सा विभाग के तीन प्राध्यापकों डॉ. सौरभ खानरा, डॉ. अनिरुद्ध मुखर्जी और डॉ. वरुण एस. मेहता के शोध प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दे दी है।

संस्थान के निदेशक डॉ. वी.के. चौधरी ने इस उपलब्धि को सीआईपी के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस समिति के गठन से संस्थान में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नैतिकतापूर्ण रिसर्च को नई गति और दिशा मिलेगी। इस नवगठित समिति में रिम्स के डॉ. राजकुमार को अध्यक्ष, रिनपास के डॉ. अमूल रंजन सिंह को उपाध्यक्ष और सीआईपी के डॉ. उमेश एस को सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा, शोध में सामाजिक, कानूनी और दार्शनिक पहलुओं को संतुलित रखने के लिए कानून विश्वविद्यालय (NUSRL), गोस्सनर कॉलेज सहित विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों और सामाजिक प्रतिनिधियों को भी इस समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है।
