द जन सभा | निरंजन भारती
क्षेत्र के खटंगा में शुक्रवार को मुहर्रम का पारंपरिक जुलूस पूरी अकीदत, शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे के साथ निकाला गया। इस गाँव का इतिहास और मुहर्रम की परंपरा बेहद गौरवशाली रही है, यहाँ साल 1932 से प्रत्येक वर्ष बिना रुके मुहर्रम का जुलूस पूरी भव्यता के साथ निकाला जाता रहा है। दशकों पुरानी इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए इस बार भी सैयुद्दीन खलीफा के नेतृत्व में अखाड़ेधारियों ने पारंपरिक हथियारों का प्रदर्शन करते हुए जुलूस की शोभा बढ़ाई।

जुलूस के दौरान मौजूद वरिष्ठ कांग्रेस नेता जमील अख्तर ने समाज को एकजुट रहने का संदेश देते हुए कहा, खटंगा गाँव का इतिहास गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल रहा है। साल 1932 से शुरू हुई यह मुहर्रम की परंपरा आज भी समाज के सभी वर्गों के सहयोग और आपसी प्रेम की बदौलत ही कायम है। इमाम हुसैन की शहादत हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देती है। इस ऐतिहासिक जुलूस में जिस तरह युवाओं और बुजुर्गों ने अनुशासन और शांति का परिचय दिया है, वह सराहनीय है। हमारा प्रयास हमेशा क्षेत्र में शांति, विकास और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का रहेगा। मैं इस सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए आयोजन समिति और क्षेत्र की जनता को बधाई देता हूँ।

इस दौरान इमाम बक्स अखाड़ा, सेंट्रल मुहर्रम कमिटी गागी और मुहर्रम कमिटी चाम बुडू के प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में संजर खान, जियारत अंसारी, मो. सहीदीन अंसारी, जिला परिषद हिना परवीन, कांग्रेस नेता जमील अख्तर, पूर्व उप प्रमुख सज्जाद अंसारी, सदर अजहर अली, सदर इम्तियाज अंसारी, कलीम अंसारी, जासीम अंसारी, आबिद अंसारी और मुस्ताक अंसारी का सराहनीय योगदान रहा।

इस अवसर पर जुलूस का नेतृत्व कर रहे सैयुद्दीन खलीफा ने अपने बयान में कहा, मुहर्रम का त्योहार हमें त्याग, बलिदान और हक के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। खटंगा गाँव की यह खूबसूरत और ऐतिहासिक परंपरा रही है कि साल 1932 से हमारे पूर्वज जिस सौहार्द के साथ इसे मनाते आ रहे हैं, आज की पीढ़ी भी उसे उसी शिद्दत से आगे बढ़ा रही है। यहाँ हर त्योहार सभी धर्म और वर्ग के लोग मिलकर मनाते हैं। आज का यह सफल और शांतिपूर्ण आयोजन हमारे इसी कौमी एकता और अटूट भाईचारे का प्रतीक है। मैं तमाम कमेटियों, बुजुर्गों, युवाओं, क्षेत्र की जनता और जिला प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग से हमारी यह ऐतिहासिक परंपरा इतनी सादगी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

इस अवसर पर जुलूस का नेतृत्व कर रहे सैयुद्दीन खलीफा ने अपने बयान में कहा, मुहर्रम का त्योहार हमें त्याग, बलिदान और हक के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। खटंगा गाँव की यह खूबसूरत और ऐतिहासिक परंपरा रही है कि साल 1932 से हमारे पूर्वज जिस सौहार्द के साथ इसे मनाते आ रहे हैं, आज की पीढ़ी भी उसे उसी शिद्दत से आगे बढ़ा रही है। यहाँ हर त्योहार सभी धर्म और वर्ग के लोग मिलकर मनाते हैं। आज का यह सफल और शांतिपूर्ण आयोजन हमारे इसी कौमी एकता और अटूट भाईचारे का प्रतीक है। मैं तमाम कमेटियों, बुजुर्गों, युवाओं, क्षेत्र की जनता और जिला प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग से हमारी यह ऐतिहासिक परंपरा इतनी सादगी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

मोहर्रम जुलूस को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रहे कांके थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर कुणाल कुमार, तंजील खान सहित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं पूरे जुलूस की लगातार निगरानी की। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी, जबकि जुलूस के मार्ग पर पुलिसकर्मी लगातार गश्त करते रहे। अधिकारियों ने आयोजन समिति के साथ समन्वय बनाकर यातायात व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित किए।
