Birsa Agriculture University: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित Tarang महोत्सव का हुआ समापन

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द जन सभा  | निरंजन भारती

दो दिनों तक सांस्कृतिक रंगों में डूबा बिरसा कृषि विश्वविद्यालय

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वानिकी संकाय में दो दिवसीय वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव तरंग का गुरुवार को समापन हो गया । दो दिवसीय इस महोत्सव में संकाय के छात्र-छात्राओं ने कला, संगीत, नृत्य, साहित्य और रंगमंच की विविध विधाओं में अपनी उत्कृष्ट और बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री व टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो और कांके विधायक सुरेश कुमार बैठा मौजूद रहे, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

समारोह को संबोधित करते हुए दोनों विधायकों ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे सांस्कृतिक और रचनात्मक आयोजन युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद आवश्यक हैं। इनसे न केवल छात्रों का मानसिक तनाव दूर होता है, बल्कि उनके भीतर छिपी नेतृत्व क्षमता, आत्म-अनुशासन और आत्मविश्वास को भी एक नई दिशा और मंच मिलता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुनील चंद्र दुबे ने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि बीएयू शैक्षणिक गतिविधियों के साथ- साथ विद्यार्थियों की सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रतिभा को तराशने के लिए हमेशा तत्पर रहेगा ताकि उनका बहुआयामी विकास हो सके। कार्यक्रम में छात्र कल्याण निदेशक डॉ. बी.के. अग्रवाल, कुलसचिव डॉ. एस. चट्टोपाध्याय और कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. डी.के. शाही ने भी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।

महोत्सव के दौरान आयोजित ललित कला प्रतियोगिताओं में छात्रों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। ऑन-द-स्पॉट पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग, क्ले मॉडलिंग, कार्टूनिंग, कोलाज और रंगोली जैसी स्पर्धाओं में छात्रों ने रंगों और मिट्टी के जरिए अपनी अनूठी सोच को कैनवास पर उकेरा। वहीं, साहित्यिक विधाओं के अंतर्गत आयोजित क्विज़, वाद-विवाद, भाषण और तात्कालिक भाषण में छात्रों ने अपनी प्रखर बौद्धिक और तार्किक क्षमता का शानदार परिचय दिया।

वहीं सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण संगीत, नृत्य और रंगमंच की प्रस्तुतियां रहीं, जिन्होंने दर्शकों को बांधे रखा। जहां एक ओर देशभक्ति गीतों और समूह गायन के सुरों से पूरा परिसर गूंज उठा, वहीं दूसरी ओर लोक और जनजातीय थीम पर आधारित मनमोहक समूह नृत्यों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इसके साथ ही सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों पर आधारित वन-एक्ट प्ले, स्किट, माइम और मोनो एक्टिंग जैसी नाट्य प्रस्तुतियों ने समाज को सशक्त संदेश दिया।

इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता प्रतिभागियों को वानिकी संकाय के अधिष्ठाता डॉ. कौशल कुमार और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। महोत्सव को सुचारू रूप से संचालित करने और इसे सफल बनाने में सांस्कृतिक सचिव डॉ. जे.के. केरकेट्टा, डॉ. ए.के. चक्रवर्ती, डॉ. प्रभात रंजन उरांव और एस.जे. बाकला ने सराहनीय योगदान रहा ।

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