महिला आरक्षण बिल: रांची की सड़कों पर ‘मातृशक्ति’ का इंडी गठबंधन के खिलाफ हुंकार

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The Jan Sabha रांची, विशेष संवाददाता: राजधानी रांची की सड़कें शनिवार को उस वक्त नारों से गूंज उठीं, जब चिलचिलाती गर्मी और भारी तपिश के बीच हजारों महिलाओं ने ‘महिला आक्रोश मार्च’ के जरिए विपक्षी ‘इंडी’ (INDI) गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को संसद में रोकने के खिलाफ महिलाओं का यह गुस्सा मोरहाबादी मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक विशाल जनसैलाब के रूप में दिखाई दिया। इस पदयात्रा ने न केवल विपक्षी दलों के महिला विरोधी रवैये को कठघरे में खड़ा किया, बल्कि राज्य की सियासत में एक बड़े बदलाव की आहट भी दे दी है।


मोरहाबादी में संकल्प सभा: अन्नपूर्णा देवी का प्रहार


आक्रोश मार्च का नेतृत्व कर रही केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने मोरहाबादी मैदान में आयोजित विशाल सभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से ही ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं से महिलाओं को सशक्त किया है। लेकिन जब उन्हें संसद और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देकर नीति-निर्धारण में भागीदारी देने की बारी आई, तो कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने संसद में इस बिल को पारित होने नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने न केवल इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया, बल्कि मेज थपथपाकर नारी शक्ति का अपमान भी किया, जिसका जवाब आगामी चुनाव में देश की महिलाएं देंगी।


बहुरुपियों से सावधान रहने की चेतावनी: आदित्य साहू


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस और झामुमो (JMM) को ‘बहुरुपिया’ करार देते हुए जनता को आगाह किया। उन्होंने कहा कि एक गरीब परिवार से आने वाले पीएम मोदी महिलाओं का दर्द समझते हैं, लेकिन कांग्रेस सिर्फ सोनिया और प्रियंका गांधी की और हेमंत सोरेन सिर्फ कल्पना सोरेन की चिंता करते हैं। उन्होंने राज्य में बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं और कानून-व्यवस्था की लचर स्थिति पर भी चिंता जताई। साहू ने ‘मईया योजना’ को सरकार का ढकोसला बताते हुए कहा कि जो लोग आरक्षण के नाम पर महिलाओं को गुमराह कर रहे हैं, उन्हें गांवों से खदेड़ने का समय आ गया है।


विपक्ष का अहंकार महिलाओं के गुस्से में होगा स्वाहा: बाबूलाल मरांडी


नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस और झामुमो ने विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण बिल का विरोध कर यह साबित कर दिया है कि वे महिलाओं को समान भागीदारी देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इंडी गठबंधन ने समय रहते अपनी मानसिकता नहीं बदली, तो वे ‘आधी आबादी’ के इस आक्रोश में जलकर स्वाहा हो जाएंगे। मरांडी ने रघुवर दास और अर्जुन मुंडा के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा ने हमेशा सीटों की बढ़ोतरी और आरक्षण की वकालत की है, जबकि विपक्ष ने हर मौके पर अड़ंगा डाला है।

इस आंदोलन में समाज की प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी अपनी आवाज बुलंद की। पद्मश्री छुटनी महतो ने भावुक होते हुए कहा कि जो काम कांग्रेस 30 साल में नहीं कर पाई, उसे पीएम मोदी ने कर दिखाया। उन्होंने संसद की कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि वे अब कभी कांग्रेस का समर्थन नहीं करेंगी। वहीं, पद्मश्री जमुना टुडू ने भी 70 साल के कांग्रेस शासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाएं अब अपना अधिकार छीनना जानती हैं।


सत्ता के गलियारों तक पहुंची गूंज: दिग्गज रहे मौजूद


मार्च के दौरान ‘नारी अबला नहीं, सबला है’ और ‘उलगुलान होगा’ जैसे नारों से पूरा वातावरण राष्ट्रवाद और महिला स्वाभिमान के रंग में डूबा रहा। इस विशाल पदयात्रा में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, विधायक नीरा यादव, और रोशनी खलखो ने भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। कार्यक्रम का संचालन पूर्व सांसद गीता कोड़ा और सीमा सिंह ने किया।


इस मौके पर संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, अर्जुन मुंडा, चंपई सोरेन, और मधु कोड़ा समेत भाजपा के तमाम वरिष्ठ नेता और हजारों की संख्या में प्रदेश भर से आई महिलाएं मौजूद थीं, जिन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि रांची की धरती से उठी यह आवाज दिल्ली के तख्त तक गूंजेगी।

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