द जन सभा | निरंजन
रांची के नगड़ी में रिम्स-2 के नाम पर बिना उचित अधिग्रहण आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन छीनने के कथित सरकारी प्रयासों के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को सोशल मीडिया (ट्वीट) के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए चंपई सोरेन ने कहा कि यह सरकार अब अपनी सारी सीमाएं लांघ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि रांची शहर आदिवासियों की जमीनों पर ही बसा है, जहां पूर्व में एचईसी ने 7,200 एकड़ जमीन ली पर प्लांट सिर्फ 500 एकड़ में बनाया। इसके अलावा लॉ यूनिवर्सिटी, हाई कोर्ट, विधानसभा और माननीयों के बंगलों के लिए रैयतों की जमीनें तो ली गईं, लेकिन आज तक किसी को पुनर्वास नहीं मिला। उल्टा, जब एचईसी ने जमीनें वापस कीं, तो सरकार उन्हें मूल रैयतों को लौटाने के बजाय बेचने में जुट गई। उन्होंने आरोप लगाया कि रांची, हटिया और कांके विधानसभा क्षेत्रों में बची-खुची आदिवासी जमीनों को भी छीनने का यह एक बड़ा षडयंत्र है और सरकार का मुख्य मकसद इस क्षेत्र से भूमिपुत्रों को उजाड़ना ही है।

अधिग्रहण के दावों को चुनौती और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने विवादित भूमि पर सरकार के कानूनी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1957-58 के जिस अधिग्रहण का हवाला दिया जा रहा है, वह कभी पूरा ही नहीं हुआ था क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने विरोध के बाद इसे रोकने की बात कही थी। इसके बाद स्थानीय किसान 2012-13 तक उस भूमि की मालगुजारी भी देते रहे और वहां लगातार खेती होती रही। भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का हवाला देते हुए चंपई सोरेन ने स्पष्ट किया कि यदि रैयतों को मुआवजा न मिला हो या सरकार का कब्जा न हो, तो प्रक्रिया रद्द मानी जाती है। उन्होंने राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि रिम्स की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है, चाईबासा में बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाने और झोले में शव ले जाने जैसी हृदयविदारक तस्वीरें आ रही हैं। जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की नई बिल्डिंग बनने के बाद भी वहां डॉक्टर-दवाइयां गायब हैं और सरायकेला में उनके द्वारा बनवाया गया अस्पताल डेढ़ साल से शुरू नहीं हो सका है। सोरेन ने चेतावनी दी कि सीएनटी एक्ट और पांचवीं अनुसूची की धज्जियां उड़ाने वाली इस तानाशाही सरकार के खिलाफ अब नगड़ी में आदिवासियों का ‘महादरबार’ सजेगा, जहां लाखों लोग एकजुट होकर अपने खेतों में हल चलाएंगे और अपनी जमीन की रक्षा करेंगे।
