RINPAS Ranchi news: रिनपास उप-निदेशक विभागीय प्रभारियों के साथ करेंगे समीक्षा बैठक

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द जन सभा | निरंजन भारती

लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

RINPAS अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए उप-प्रशासक मिथिलेश कुमार चौधरी जल्द ही एक बड़ी समीक्षा बैठक करेंगे । इस बैठक में ओपीडी, टेक्निकल, नॉन-टेक्निकल और वार्ड समेत सभी विभागों के प्रभारियों को मौजूद रहने को कहा गया है। उप-प्रशासक ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि अस्पताल के कामकाज में किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शिकायत सही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।

बाहर से दवाइयां लिखने के आरोपों की होगी जांच

उप-प्रशासक ने इस संबंध में कहा कि अस्पताल आने वाले मरीजों का सही इलाज और देखभाल ही हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। मरीजों को अंदर दवाएं न मिलने और बाहर से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतों पर उन्होंने कहा कि प्रशासन इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि इस पूरे खेल की जांच कराई जाएगी और अगर कोई भी डॉक्टर या कर्मचारी इसमें दोषी मिला, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई होना तय है।

व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का आश्वासन

संस्थान में प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर लग रही गड़बड़ियों और अनियमितताओं के आरोपों पर उप-प्रशासक ने खुलकर बात की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अस्पताल की साख और मरीजों के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि व्यवस्था को पूरी तरह से पटरी पर लाने के लिए हर जरूरी और कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। उप-प्रशासक ने जोर देकर कहा कि हमारा एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की तरफ से मिलने वाली हर छोटी-बड़ी सुविधा और मुफ्त दवाइयों का लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचे, बिना किसी बिचौलिए या रुकावट के। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कामकाज में जहां कहीं भी विसंगतियां या कमियां हैं, उन्हें जल्द से जल्द दुरुस्त कर लिया जाएगा ।

जनरेटर खरीद में कथित हेरफेर का नया मामला आया सामने

मीडिया पोर्टल The Jan Sabha द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट के बाद, अब संस्थान से जुड़ा एक और नया मामला चर्चा में आ गया है। सामने आई खबरों और दावों के मुताबिक, अस्पताल के लिए अशोक लीलैंड कंपनी के जनरेटर की आपूर्ति का आदेश जारी किया गया था, लेकिन कथित तौर पर मौके पर जैक्सन कंपनी का जनरेटर लगा पाया गया है। कागजों में दर्ज आदेश और मौके पर मौजूद उपकरण में इस कथित अंतर को लेकर अब प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कई तरह के गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, यह पूरा मामला अभी जांच और सत्यापन का विषय है कि यह फेरबदल किन परिस्थितियों में और किस स्तर पर हुआ। इस नए मामले के सामने आने के बाद, अब यह देखना अहम होगा कि अस्पताल प्रशासन इस विसंगति पर क्या स्पष्टीकरण देता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

खरीद समिति के फैसले पर उप-प्रशासक का बयान

जब इस जनरेटर से जुड़े हालिया विवाद और संस्थान में लग रहे कथित वित्तीय अनियमितताओं के बड़े आरोपों को लेकर उप-प्रशासक मिथिलेश कुमार चौधरी से उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान के भीतर किसी भी तरह की खरीद के लिए खरीद समिति कार्यरत है, जिसके अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलई के पास है। उप-प्रशासक ने साफ लहजे में कहा, इस विषय पर कोई भी आधिकारिक बयान देने के लिए मैं अधिकृत नहीं हूँ। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर क्या और कैसे हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी न तो हमारे पास है और न ही इस संबंध में हमें कोई विवरण दिया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी जब स्वास्थ्य क्षेत्र में कथित तौर पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के बड़े आरोप सामने आए थे, तब भी उप-प्रशासक का रुख कुछ ऐसा ही था। उन्होंने तब भी स्पष्ट किया था कि प्रशासनिक नियमों के तहत वे इस विषय पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने के दायरे में नहीं आते हैं। उप-प्रशासक के इस बयान से यह साफ है कि वे संस्थान की स्थापित व्यवस्था और नियम-कायदों का पालन कर रहे हैं, जिसके तहत खरीद से जुड़े तकनीकी फैसलों और उनके विवरणों की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर संबंधित परचेज कमेटी और शीर्ष नेतृत्व के अधिकार क्षेत्र में आती है।

प्रभारी निदेशक के आधिकारिक बयान का इंतजार

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि जनरेटर विवाद और कथित वित्तीय गड़बड़ियों के इतने बड़े आरोपों के बाद भी संस्थान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से चुप्पी साधी गई है। खबर लिखे जाने तक, इस गंभीर विषय पर प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलई या संस्थान के किसी भी अन्य अधिकृत अधिकारी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या पक्ष सामने नहीं आया है। मीडिया और आम जनता को अब इस बात का इंतजार है कि इन कथित विसंगतियों और उठ रहे सवालों पर प्रबंधन कब अपनी स्थिति स्पष्ट करता है। अस्पताल की साख को देखते हुए अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रभारी निदेशक या प्रशासन का इस पूरे घटनाक्रम पर क्या आधिकारिक जवाब आता है।

मामले पर स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिक्रिया का इंतजार

अस्पताल में सामने आई इन कथित विसंगतियों, जनरेटर विवाद और खरीद प्रक्रिया में लगे गंभीर आरोपों को लेकर The Jan Sabha की टीम ने पूरी निष्पक्षता के साथ जिम्मेदारी निभाते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से भी उनका आधिकारिक पक्ष जानने का प्रयास किया है। हालांकि, खबर के प्रकाशित होने तक स्वास्थ्य मंत्री या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या बयान प्राप्त नहीं हो सका है।

पत्रकारिता के मानदंडों और निष्पक्षता का पालन करते हुए The Jan Sabha यह स्पष्ट करता है कि इस पूरे मामले में जैसे ही स्वास्थ्य मंत्री, उनके कार्यालय या किसी भी अधिकृत सरकारी अधिकारी का कोई भी पक्ष, स्पष्टीकरण या आधिकारिक बयान सामने आता है, उसे इस रिपोर्ट में प्रमुखता से और बिना किसी काट-छांट के ज्यों का त्यों प्रकाशित किया जाएगा।

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