10 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन शुल्क से लेकर नए कर्मचारियों से लाखों की कथित मांग तक के आरोप, मंत्री इरफान अंसारी ने जांच के दिए संकेत
द जन सभा | रांची | निरंजन भारती
कांके स्थित रिनपास में हाउसकीपिंग व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। संस्थान में एक सितंबर से बजरंग सिक्योरिटी एजेंसी ने हाउसकीपिंग का काम संभाला, लेकिन कार्यभार संभालने के पहले ही दिन सफाईकर्मियों की शिकायत विभागीय मंत्री डॉ. इरफान अंसारी तक पहुंच गई। कांग्रेस प्रखंड अध्यक्ष संजर खान और पंचायत समिति सदस्य सह कांग्रेस नेता लालचंद सोनी के नेतृत्व में 50 से अधिक महिला और पुरुष सफाईकर्मी मंत्री से मिलने पहुंचे। सफाईकर्मियों ने नई एजेंसी पर कई गंभीर आरोप लगाए और मौजूदा वेतन तथा रोजगार को लेकर चिंता जाहिर की।
सफाईकर्मियों का आरोप रजिस्ट्रेशन के नाम पर मांगे जा रहे 10 हजार रुपये
सफाईकर्मियों की ओर से मंत्री को बताई गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि एजेंसी द्वारा रजिस्ट्रेशन शुल्क के नाम पर कथित तौर पर प्रत्येक कर्मचारी से 10 हजार रुपये की मांग की जा रही है। इसके अलावा नए सफाईकर्मियों की नियुक्ति में भी कथित तौर पर बड़ी रकम मांगे जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक करीब 40 से 50 नए सफाईकर्मियों को रखने की बात सामने आ रही है और इनमें प्रत्येक से एक लाख रुपये या उससे अधिक की मांग की जा रही है।
सफाईकर्मियों की 11,300 रुपये की तनख्वाह भी घटेगी!
सफाईकर्मियों का कहना है कि वे वर्तमान में करीब 11,300 रुपये मासिक वेतन पा रहे हैं। उनका आरोप है कि नई एजेंसी जिस दर पर काम करने आई है, उससे उनकी मौजूदा मजदूरी प्रभावित हो सकती है। सफाईकर्मियों ने मंत्री से मांग की कि उनका वेतन कम नहीं किया जाए और उन्हें गार्ड्स के समान निर्धारित वेतनमान के अनुरूप भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ईपीएफ और बोनस की राशि भी नियमानुसार देने की मांग की गई।
39 हजार रुपये रोज का मैटिरियल खर्च कैसे ?
इस पूरे विवाद में हाउसकीपिंग के लिए निर्धारित मैटिरियल खर्च भी सवालों के घेरे में है। कांग्रेस नेता संजर खान ने दावा किया कि नई एजेंसी को सफाई सामग्री के लिए प्रतिदिन 39 हजार रुपये की दर से भुगतान किया जाना है। अगर यह दर पूरे महीने लागू रहती है तो 30 दिनों में मैटिरियल पर करीब 11.70 लाख रुपये खर्च बैठता है।
पांच साल में मैटिरियल खर्च 20 गुना बढ़ने का दावा
रिनपास की हाउसकीपिंग व्यवस्था में मैटिरियल खर्च को लेकर पुराने और नए आंकड़ों की तुलना भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2021-22 में तत्कालीन हाउसकीपिंग एजेंसी को प्रतिमाह करीब 60 हजार रुपये मैटिरियल खर्च के रूप में दिए जाते थे। इसके बाद एवरग्रीन सर्विसेज को प्रतिदिन करीब छह हजार रुपये, यानी टैक्स समेत महीने में लगभग दो लाख रुपये के आसपास भुगतान किया जाता था, वहीं नई एजेंसी के लिए 39 हजार रुपये प्रतिदिन की दर सामने आने पर यह राशि महीने में करीब 12 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यदि ये आंकड़े सही हैं तो पांच वर्षों में मैटिरियल खर्च में असाधारण वृद्धि हुई है। यही वह बिंदु है जिस पर अब पारदर्शिता और वित्तीय जांच की मांग उठ रही है।
मंत्री ने निदेशक को फोन कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया
सफाईकर्मियों और कांग्रेस नेताओं ने जब मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के सामने अपनी शिकायत रखी तो मंत्री ने रिनपास की प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलई से फोन पर बात की। बताया गया कि मंत्री ने एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल किया। वहीं निदेशक की ओर से कहा गया कि एजेंसी को टेंडर प्रक्रिया में एल-1 होने के आधार पर काम दिया गया है। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि नियमों के तहत चयनित एजेंसी को हटाने की कार्रवाई करने पर उनके लिए कानूनी परेशानी खड़ी हो सकती है। यह जवाब अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है अगर चयन प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है, तो क्या उसके बाद कर्मचारियों से कथित वसूली के आरोपों की स्वतंत्र जांच की व्यवस्था है?
कांके विधायक करेंगे जांच, एजेंसी प्रतिनिधि को बुलाने का निर्देश
मंत्री ने मामले की जांच के लिए कांके विधायक सुरेश कुमार बैठा के जाने की बात कही। साथ ही एजेंसी के प्रतिनिधि को रिनपास निदेशक के साथ उनके समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब निगाह इस बात पर है कि जांच में सफाईकर्मियों द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही पाए जाते हैं और अगर किसी तरह की अनियमितता मिलती है तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
कांग्रेस नेताओं ने दी चेतावनी कहा गरीब सफाईकर्मियों से वसूली नहीं होने देंगे
संजर खान और लालचंद सोनी ने कहा है कि सफाईकर्मियों के साथ कथित आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मौजूदा वेतन से कम भुगतान नहीं करने, ईपीएफ और बोनस का सही भुगतान करने तथा नियुक्ति के नाम पर कथित वसूली रोकने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सफाईकर्मियों से पैसे की कथित मांग जारी रहती है या वेतन में कटौती की जाती है तो आंदोलन किया जाएगा।
रिनपास में सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, सिस्टम की सफाई का भी है
रिनपास में नई एजेंसी ने काम शुरू किया और पहले ही दिन सफाईकर्मी मंत्री के पास शिकायत लेकर पहुंच गए। यह घटनाक्रम अपने आप में व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब असली परीक्षा सिर्फ बजरंग सिक्योरिटी एजेंसी की नहीं, बल्कि रिनपास प्रशासन और संबंधित विभाग की भी है। सवाल यह है कि क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी, क्या सफाईकर्मियों का वेतन सुरक्षित रहेगा और क्या सार्वजनिक धन से होने वाले लाखों रुपये के खर्च का पूरा हिसाब सामने आएगा? या फिर राजनीति का भेंट चढ़ जाएगा ?
