Jharkhand Forest Digital Map Layering : मुख्यमंत्री ने दिए एक माह के भीतर वन क्षेत्रों के डिजिटल कायाकल्प के निर्देश

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द जन सभा | निरंजन भारती

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में राज्य के वन संसाधनों के संरक्षण, विकास और वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर कई कड़े और महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया कि राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक के सभी वन क्षेत्रों का एक तकनीकी और डिजिटल रिकॉर्ड हर हाल में एक महीने के भीतर तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के बाद वनों के स्वरूप में व्यापक बदलाव आए हैं कहीं जंगलों का विस्तार हुआ है, तो कहीं खनन, इको-टूरिज्म परियोजनाओं और वनों की कटाई के कारण सीमाओं में परिवर्तन हुआ है। ऐसे में पूरे राज्य के वनों की वास्तविक संरचना और वर्तमान स्थिति को एक क्लिक पर देखने के लिए डिजिटल मैप की लेयरिंग करना और इसका अद्यतन वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार करना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।

हवाई मार्ग से बीज गिराने की अनूठी योजना और वन पट्टा मामलों का त्वरित निष्पादन

मुख्यमंत्री ने वनों की सुरक्षा और उनके सतत विकास को राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए एक बेहद आधुनिक और अनूठी कार्ययोजना पर काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के दुर्गम और घने वन क्षेत्रों के विकास के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से हवाई बीज वपन करने की एक बेहतर योजना तैयार की जाए। इसके साथ ही, ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों, विशेषकर जंगली हाथियों के हमलों से होने वाले जान-माल के नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने मुआवजा प्रक्रिया को तेज करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि हाथियों के हमले में मृत व्यक्तियों के आश्रितों तथा क्षतिग्रस्त फसलों और मकानों के मुआवजे का भुगतान बिना किसी देरी के तत्परता से किया जाए। इसके अलावा, आम नागरिकों और आदिवासियों से जुड़े वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन करना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि पात्र लाभुकों को उनका हक समय पर मिल सके।

पौधरोपण नीति में बड़ा बदलाव: केवल संख्या नहीं, स्थानीय इको-सिस्टम और आजीविका हो आधार

बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभाग की पारंपरिक पौधरोपण नीति में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि पौधरोपण केवल सरकारी आंकड़ों में संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि पौधारोपण का कार्य पूर्णतः उपयोगिता आधारित और स्थानीय इको-सिस्टम के अनुरूप होना चाहिए। अधिकारियों को ऐसे वृक्षों का चयन करने के लिए कहा गया है जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीणों की आजीविका, पशुओं की जरूरतों और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दें। मुख्यमंत्री ने अनुपयोगी पेड़ों को लगाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जो वृक्ष न तो पशुओं के काम आएं और न ही स्थानीय समुदाय की आर्थिक मदद कर सकें, उन्हें लगाने का कोई औचित्य नहीं है।

महुआ, पलाश और अर्जुन जैसे वृक्षों से बढ़ेगी ग्रामीणों की आय और लाह-तसर उद्योग को मिलेगी गति

ग्रामीणों की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने वन एवं गैर-वन क्षेत्रों में महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, बैर, कटहल, आंवला और चिरौंजी जैसे फलदार व आर्थिक रूप से उपयोगी वृक्षों को बड़े पैमाने पर लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की एक बहुत बड़ी आबादी ग्रामीण और वन क्षेत्रों में निवास करती है, जो सीधे तौर पर वनोपज पर निर्भर है। महुआ, जामुन और कटहल जैसे वृक्ष स्थानीय लोगों को पोषण और अतिरिक्त आय का जरिया देंगे, जबकि लाह और तसर उत्पादन के लिए सबसे उपयोगी माने जाने वाले पलाश, कुसुम और अर्जुन के वृक्षों से राज्य के पारंपरिक लाह एवं रेशम उद्योग को एक नई गति मिलेगी। इससे न केवल राज्य की जैव विविधता समृद्ध होगी, बल्कि वनों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं योजना के प्रभावी प्रचार का आदेश

पर्यावरण संरक्षण को शहरी विकास और आम नागरिकों की भागीदारी से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री ने शहरों में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की और वहां हरियाली बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “एक पेड़ लगाओ, पांच यूनिट फ्री बिजली पाओ का व्यापक और प्रभावी प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया ताकि अधिक से अधिक शहरी नागरिक इस अभियान से जुड़ सकें। इस योजना के तहत घरों या निजी परिसरों में एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने पर नागरिकों को पांच यूनिट बिजली पूरी तरह से निशुल्क दी जाएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण को तेजी से बढ़ाया जा सके।

काजू और बांस की व्यावसायिक खेती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

राज्य के बड़े भू-भागों का आर्थिक इस्तेमाल करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने काजू और बांस जैसी व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य में उपयुक्त बड़े भू-भागों की पहचान करें और वहां व्यापक स्तर पर काजू के पौधे लगाकर उत्पादन की नई संभावनाओं को तलाशें, जिससे किसानों के लिए आय के नए स्रोत सृजित हो सकें। इसके साथ ही, बांस के सुनियोजित विकास और बांस आधारित कुटीर उद्योगों व बैम्बू क्राफ्ट को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के बड़े अवसर पैदा करने की बात कही। शहरी क्षेत्रों के पर्यावरणीय संतुलन के लिए उन्होंने अकाशिया सहित अन्य घने और छायादार पेड़ लगाने के निर्देश दिए ताकि प्रदूषण को नियंत्रित कर लोगों को स्वच्छ वातावरण दिया जा सके।

पर्यटन और वन विभाग के समन्वय से निखरेगा झारखंड में इको-टूरिज्म का चेहरा

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की असली पहचान उसकी समृद्ध प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, वन्यप्राणियों और अद्वितीय जैव विविधता से है, जिसका संरक्षण करना सरकार का परम कर्तव्य है। उन्होंने राज्य में इको-टूरिज्म की असीम संभावनाओं को रेखांकित करते हुए वन विभाग और पर्यटन विभाग को आपस में बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित कर एक संयुक्त मास्टर प्लान के साथ आगे बढ़ने को कहा। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने झारखंड मंत्रालय से ही ऑनलाइन माध्यम के जरिए राज्य के सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने दुमका, जामताड़ा और कोडरमा के अधिकारियों से विशेष रूप से वन पट्टा वितरण, व्यावसायिक पौधरोपण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाइयों की समीक्षा की और योजनाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से लागू करने की हिदायत दी।

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