Jharkhand News: सरकार से संवाद और समाधान चाहते हैं हम: मनरेगा कर्मी

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द जन सभा | निरंजन

झारखंड में पिछले लगभग तीन महीनों से अपनी लंबित और न्यायोचित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे मनरेगा कर्मियों ने सरकार से संवेदनशील रुख अपनाने की अपील की है। कर्मियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या बाहरी प्रभाव का नतीजा नहीं है, बल्कि दो दशकों से ग्रामीण विकास में योगदान दे रहे हजारों कर्मचारियों की वास्तविक पीड़ा और उपेक्षा का परिणाम है। आंदोलनकारी कर्मियों ने स्पष्ट किया कि वे सरकार के विरोध में नहीं हैं, बल्कि सम्मानजनक सेवा शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

फोटो: आंदोलित मनरेगा कर्मी

​व्यवस्था में दोहरा मापदंड और आर्थिक संकट

​आंदोलनकारियों ने विभाग के भीतर ही चल रहे दोहरे मापदंड पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक ही मनरेगा व्यवस्था के तहत राज्य मुख्यालय (कोषांग) में कार्यरत कर्मियों को ग्रेड-पे की सुविधा मिल रही है, जबकि क्षेत्रीय स्तर पर जमीन पर काम करने वाले हजारों कर्मी आज भी महज 12,000 रुपये प्रति माह के मानदेय पर पूर्णकालिक सेवा देने को मजबूर हैं। बढ़ती महंगाई के इस दौर में इतने कम मानदेय पर परिवार का भरण-पोषण करना असंभव हो गया है। इसके अलावा, कर्मियों को पिछले 8 से 10 महीनों का मानदेय भी नहीं मिला है, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

​समझौतों की अनदेखी से उपजा विश्वास का संकट

​कर्मियों के अनुसार, आंदोलन की इस स्थिति के लिए केवल उन्हें जिम्मेदार ठहराना गलत होगा। अतीत में कई बार सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच लिखित समझौते हुए और आश्वासन दिए गए, लेकिन उन्हें कभी पूरी तरह लागू नहीं किया गया। बार-बार लिखित सहमति के बाद भी मांगें लंबित रहने के कारण ही कर्मचारियों के बीच विश्वास का संकट पैदा हुआ है। इसके साथ ही, वर्षों की सेवा के दौरान जान गंवाने वाले 156 मनरेगा कर्मियों के परिवार आज भी दाने-दाने को मोहताज हैं और सामाजिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर समाधान निकाले सरकार

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सरकार को अभिभावक बताते हुए कहा कि वे संघर्ष नहीं, बल्कि न्याय चाहते हैं। उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्री, विभागीय सचिव और आयुक्त से अपील की है कि वे इस मामले को सिर्फ प्रशासनिक चश्मे से देखने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से देखें। उन्होंने माननीय मंत्री से खुद पहल कर एक सार्थक और परिणामोन्मुखी संवाद शुरू करने का आग्रह किया है।

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