फूट डालो और राज करो’ अंग्रेजों की नीति, कांग्रेस उन्हीं की मानस पुत्र, सरना, सनातन और हिंदू में कोई अंतर नहीं

द जन सभा | निरंजन
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर आदिवासी समाज को बांटने और तोड़ने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री मरांडी ने आदिवासी समागम का विरोध करने को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने इन दलों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समाज को विभाजित करने और मूल आदिवासी अधिकारों को कमजोर करने की उनकी साजिश कतई सफल नहीं होने दी जाएगी।
श्री मरांडी ने सांस्कृतिक और धार्मिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि सरना, सनातन और हिंदू में कोई अंतर नहीं है, बल्कि इनमें पूर्ण समानता है। ये सभी प्रकृति के उपासक हैं और पेड़, पहाड़, पत्थर, जल व धरती माता की पूजा करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विविधता में एकता का जो समावेश सनातन, हिंदू और सरना में है, वह अद्वितीय है। देश के अंदर आदिवासी समाज में 700 से अधिक और झारखंड में करीब 32-33 जातियां हैं, जिनकी अपने गांव-घरों में अपनी-अपनी पारंपरिक देवी-देवता हैं।
उन्होंने कांग्रेस और जेएमएम के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जहां इतनी अधिक समानता है, वहां ये लोग राजनीति के तहत भ्रम फैला रहे हैं कि आदिवासियों को हिंदू बनाया जा रहा है। श्री मरांडी ने दोटूक शब्दों में कहा कि हिंदू बनाने की कहीं कोई परंपरा या विधि ही नहीं है। धर्मांतरण के जरिए क्रिश्चियन और मुसलमान बनाए जाते हैं, जबकि सरना, सनातन और हिंदू तो पैदाइशी होते हैं।
कांग्रेस के इतिहास पर कड़ा प्रहार करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस पार्टी का गठन ही अंग्रेजों ने सन 1857 के सिपाही विद्रोह के बाद एक ‘सेफ्टी वाल्व’ के रूप में किया था ताकि देश के आक्रोश को दबाया जा सके। अंग्रेजों ने “फूट डालो और राज करो” की नीति के तहत समाज को विभाजित करके और लोगों को आपस में लड़ा कर देश पर राज किया, और कांग्रेस पार्टी उन्हीं के पदचिह्नों पर चलने वाली एक मानस पुत्र है।
उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि जब देश स्वतंत्र हुआ, तो खुद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कांग्रेस पार्टी को खत्म (भंग) करने की सलाह दी थी। परंतु कांग्रेस ने गांधी जी की इस महत्वपूर्ण बात को पूरी तरह अनसुना कर दिया और अंग्रेजों की विभाजनकारी संस्कृति पर ही लंबे वर्षों तक देश में राज करती रही। अब जब देश से कांग्रेस की विदाई हो रही है, तो यह पार्टी सत्ता सुख के लिए समाज को तोड़ने का नया-नया हथकंडा अपना रही है। भाजपा और आरएसएस पर आदिवासियों को हिंदू बनाने का आरोप इसी साजिश का एक हिस्सा है।
श्री मरांडी ने वर्तमान राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस और झामुमो केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए आदिवासी समाज में दरार पैदा कर रहे हैं। इस सरकार द्वारा पेसा (PESA) कानून की नियमावली में बदलाव कर आदिवासी परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्था को कमजोर करने का जानबूझकर प्रयास किया गया है। जो लोग आदिवासी संस्कृति, आस्था और परंपराओं को बदलने का षड्यंत्र रचते हैं, उन पर ये दोनों दल हमेशा मौन रहते हैं। इसलिए इनके मुँह से आदिवासी हित की बात शोभा नहीं देती।
धर्मांतरण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री और गठबंधन सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में जहां आदिवासियों को प्रलोभन देकर क्रिश्चियन बनाया जा रहा है और कलमा पढ़ाकर मुसलमान बनाया जा रहा है, उस पर कांग्रेस और झामुमो के लोग चुप्पी साधे हुए हैं। यहां के मूल आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा और आस्था को मिटाने का काम किया जा रहा है और वोट बैंक के लिए उन्हें मूल समाज से अलग करने की साजिश रची जा रही है, जिसे भाजपा किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि भ्रम फैलाकर समाज को गुमराह करने की नीतियां अब नहीं चलेंगी, क्योंकि समाज जागरूक हो चुका है और अपनी मूल पहचान को समझ गया है।
आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की वकालत करते हुए श्री मरांडी ने कहा कि जितनी भी जनजातियों के पारंपरिक पूजा स्थल हैं, उनको संरक्षित, सुरक्षित और विकसित करने की तत्काल जरूरत है। आज जगह-जगह पर सरना, मसना और पहनाई की जमीनें भू-माफियाओं के चंगुल में जाकर बर्बाद हो रही हैं, जिसे बचाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए क्योंकि जमीन बचेगी तभी संस्कृति बचेगी। उन्होंने याद दिलाया कि जब झारखंड अलग राज्य बना और भाजपा की सरकार आई, तो हमने ही जाहेरथान की घेराबंदी और मांझी थान बनवाने का ऐतिहासिक कार्य शुरू किया था, जिसे बाद में रघुवर दास की सरकार ने तेजी से आगे बढ़ाया । प्रेसवार्ता के दौरान मंच पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद और प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।
