RINPAS BREAKING NEWS: जब रिनपास बना कुश्ती का अखाड़ा और डॉक्टर बने ‘रेसलर’

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द जन सभा | निरंजन भारती

झारखंड के इकलौते और प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान रिनपास में शुक्रवार को एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने वहां इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों को भी सोच में डाल दिया होगा कि आखिर असली इलाज की जरूरत किसे है। ओपीडी में  झारखंड एवं बिहार के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदारों के सामने दो सीनियर मनोचिकित्सक डॉ. जेके सोलंकी और डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा आपस में भिड़ गए। आधे घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में लात-घूंसे, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां खुलेआम तैरती रहीं।

बीच-बचाव करने आए अन्य डॉक्टरों और सुरक्षाकर्मियों को भी प्रसाद के रूप में धक्का-मुक्की और गालियां नसीब हुईं। विडंबना देखिए कि जिस संस्थान का काम लोगों के उग्र व्यवहार और मानसिक तनाव को शांत करना है, उसी के ओपीडी हॉल में सीसीटीवी कैमरों के सामने डॉक्टर साहबान अपनी ही थैरेपी भूलकर लाइव एक्शन मूवी की शूटिंग कर रहे थे

जेवरात के प्रमोशन से शुरू हुआ डॉक्टरों का दंगल !

पूरे दंगल की पटकथा किसी गंभीर चिकित्सीय शोध पर नहीं, बल्कि डॉक्टर्स डे के दिन हुए एक आभूषण कंपनी के प्रमोशन वीडियो पर लिखी गई थी। दरअसल, एक निजी ज्वेलरी कंपनी ने तत्कालीन प्रभारी निदेशक के दफ्तर में डॉक्टरों का सम्मान और अपने गहनों का प्रचार किया था, जिसके लिए बाकायदा अनिवार्य उपस्थिति का हुक्मनामा जारी हुआ था। कथित तौर पर डॉ. सोलंकी ने इस आयोजन का वीडियो बनाया, जो बाद में मीडिया में लीक हो गया। अब डॉ. सोलंकी को यह दिव्य ज्ञान हुआ कि इस वीडियो को लीक करने के पीछे डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा का हाथ है। बस फिर क्या था, वॉयस मैसेज पर शुरू हुई गुटबाजी और रंजिश ओपीडी में फ्री-स्टाइल कुश्ती में तब्दील हो गई। कमाल की बात यह रही कि जब यह सब चल रहा था, तब प्रभारी निदेशक अपने कमरे में सीसीटीवी पर इस मनोरंजन का लाइव टेलीकास्ट देख रही थीं, लेकिन किसी प्रशासनिक अधिकारी ने बीच में दखल देकर डॉक्टरों का मूड स्विंग ठीक करने की जहमत नहीं उठाई। फिलहाल, संस्थान बिना किसी स्थायी निदेशक के भगवान भरोसे चल रहा है, और डॉक्टर साहब खुद के लिए दो बॉडीगार्ड मांग रहे हैं।

मार खाकर अब बॉडीगार्ड मांग रहा हूँ : डॉ सिद्धार्थ

डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा ने मेल के जरिए निदेशक को पूरी घटना से अवगत कराते हुए कहा कि, मै ओपीडी में शांतिपूर्वक मरीजों को देख रहा था। लेकिन अचानक डॉ. सोलंकी खुद का तनाव उन पर निकालने पहुंच गए। डॉ. सिद्धार्थ के मुताबिक, उन पर सरेआम जानलेवा हमला किया गया, भद्दी गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी तक मिली। उनका तर्क है कि जिस अस्पताल में वे दूसरों की दिमागी सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं, वहां अब उनकी अपनी जान ही खतरे में है। इसलिए, उन्होंने ओपीडी के दौरान मरीजों से नहीं, बल्कि अपने ही साथी डॉक्टर से खुद को बचाने के लिए बाकायदा दो हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों की मांग की है ताकि वे सुरक्षित डॉक्टर ड्यूटी निभा सकें।

डॉ सोलंकी का, आरोपों के बाद फोन नॉट रिचेबल

डॉ. जेके सोलंकी का पक्ष किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म के उस किरदार जैसा है जो सब कुछ करके भी कैमरे से दूर रहता है। घटना के तुरंत बाद उन्होंने प्रभारी निदेशक के कमरे में जाकर अपना सत्य तो दर्ज करा दिया, जिससे प्रशासनिक गलियारे में उनकी बात पहुंच गई। लेकिन जब मीडिया और जनता ने उनका पक्ष जानने के लिए फोन घनघनाया, तो डॉक्टर साहब का फोन नॉट रीचेबल मोड में चला गया। वैसे, घटना से पहले के उनके वॉयस मैसेज बताते हैं कि वे डॉ. सिद्धार्थ को गद्दार मान चुके थे, जिन्होंने ज्वेलरी प्रमोशन का वो पवित्र वीडियो मीडिया में लीक कर दिया। डॉ. सोलंकी का सीधा आरोप था कि डॉ. सिद्धार्थ वर्तमान निदेशक को नीचा दिखाने के लिए पूर्व निदेशक डॉ. सुभाष सोरेन से खुफिया मुलाकातें कर रहे थे । लेकिन डॉ सुभाष सोरेन का कहना है कि वे निदेशक पद की दौड़ में  तथा संस्थान को आंतरिक गुटबाजी में सम्मिलित नहीं है । इसके बाद भी उनका नाम अनावश्यक रूप से घसीटा जा रहा है इसकी लिखित शिकायत वे जल्द ही सक्षम अधिकारियों से करेंगे । इतने उठापटक और घमासान के बाद भी सरकार का गंभीर नहीं होना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है । न तो प्रभारी निदेशक पर लगे गंभीर आरोपों व शोकॉज के बावजूद कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही स्थाई निदेशक पद को भरे जाने के लिए विज्ञापन निकाले जा रहे हैं ।

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