गॉल ब्लैडर ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप, डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग

द जन सभा
राजधानी के सेंटावीटा अस्पताल में गॉल ब्लैडर के ऑपरेशन के दौरान कथित तौर पर डॉक्टर की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। ऑपरेशन के दौरान नस कटने और अत्यधिक ब्लीडिंग होने के कारण मरीज की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतका के जेठ ने कोतवाली थाना प्रभारी को पत्र लिखकर आरोपी डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
मोराबादी के हरिहर सिंह रोड स्थित बालाजी अपार्टमेंट के रहने वाले सुनील कुमार शुक्ला ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उनकी छोटी बहू (दिवंगत भाई स्व. दीपक कुमार शुक्ला की पत्नी) अंजना तिवारी झारखंड विधानसभा में निम्नवर्गीय सचिवालय सहायक के पद पर कार्यरत थीं। उन्हें गॉल ब्लैडर में स्टोन की शिकायत के बाद मेन रोड स्थित सेंटाविटा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
शिकायत के मुताबिक, सेंटाविटा अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार मारू ने अंजना तिवारी का ऑपरेशन किया था। आरोप है कि 24 मई 2026 को ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने लापरवाही से मरीज की मुख्य आर्टरी (धमनी) को पंचर कर दिया, जिससे भारी मात्रा में ब्लीडिंग होने लगी। स्थिति को संभालने के लिए मरीज को एक ही दिन में 6 यूनिट कोल्ड ब्लड और 2 यूनिट प्लाज्मा तक चढ़ाया गया, जिससे उनकी स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई।
मृतका के परिजनों का आरोप है कि जब ब्लीडिंग के कारण मरीज मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई, तो सेंटाविटा अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती छिपाने के लिए कार्डियक अरेस्ट का बहाना बनाया। आनन-फानन में मरीज को गंभीर हालत में ही महावीर मणिपाल अस्पताल, रांची रेफर कर दिया गया।
महावीर मणिपाल अस्पताल में डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद अंजना तिवारी को नहीं बचाया जा सका और मंगलवार सुबह करीब 9:00 बजे इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि डॉक्टर राजेश कुमार मारू और सेंटाविटा अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत के कारण ही यह असमय मौत हुई है, जो सीधे तौर पर हत्या का मामला है। परिजनों ने पुलिस से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की गुहार लगाई है।
