द जन सभा | निरंजन
झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ का पिछले सौ दिनों से चला आ रहा ऐतिहासिक और धैर्यपूर्ण आंदोलन आखिरकार शुक्रवार को समाप्त हो गया। इस लंबे संघर्ष को खत्म कराने में कांके विधायक सुरेश बैठा ने एक सच्चे जननायक और संकटमोचक की भूमिका निभाई। उन्होंने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया और मनरेगा कर्मचारियों को अपने हाथों से नारियल पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया। विधायक सुरेश बैठा के इस भगीरथ प्रयास से न केवल मनरेगा कर्मियों के चेहरे पर मुस्कान लौटी है, बल्कि उनके हकों की रक्षा भी सुनिश्चित हुई है। इस समझौते के तहत कर्मचारियों के मानदेय सहित तीन प्रमुख मांगों पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है, जिससे राज्यभर के हजारों मनरेगा कर्मियों में भारी उत्साह और राहत का माहौल है।

इस ऐतिहासिक सफलता को धरातल पर उतारने के लिए विधायक सुरेश बैठा ने खुद आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। उन्होंने मनरेगा आयुक्त, विभागीय सचिव और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका सिंह पांडेय के साथ लंबी वार्ता कर कर्मचारियों की जायज मांगों को मजबूती से सरकार के समक्ष रखा। इस संबंध में अपना बयान जारी करते हुए कांके विधायक सुरेश बैठा ने कहा कि मनरेगा कर्मचारी ग्रामीण विकास की रीढ़ हैं और उनके साथ किसी भी कीमत पर अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा समीक्षा के बाद पिछले तीन महीनों से अधिक समय से आंदोलित कर्मचारियों के रुके हुए वेतन का भुगतान कराने का अथक प्रयास करूंगा। बैठा ने आगे कहा कि वह बहुत जल्द व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री से मिलकर कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों से उन्हें अवगत कराएंगे। इसके साथ ही, उन्होंने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि ड्यूटी के दौरान किसी भी अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में उनके परिवारों को वित्तीय संबल देने के लिए अन्य सरकारी सेवकों की तर्ज पर सामाजिक सुरक्षा गारंटी बीमा का लाभ हर हाल में दिलाया जाएगा।

विधायक सुरेश बैठा के इस अभूतपूर्व और संवेदनशील प्रयास की बदौलत आज मनरेगा कर्मचारियों के मान-सम्मान और हक की बड़ी जीत हुई है। आंदोलन की समाप्ति पर झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ने विधायक सुरेश बैठा के प्रति गहरी कृतज्ञता जताते हुए अपना बयान जारी करते हुए भावुक शब्दों में कहा कि हमारे 103 दिनों के कड़े संघर्ष और पीड़ा को अगर किसी ने सच में समझा है, तो वह विधायक सुरेश बैठा हैं। उन्होंने हमारे अभिभावक की तरह सरकार और प्रशासन के सामने हमारी आवाज को बुलंद किया और हमें हमारा हक दिलाया। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि तीन महीनों के बकाए वेतन की समीक्षा कर भुगतान करने और दुर्घटना की स्थिति में परिवार को बीमा सुरक्षा कवच देने के वादे ने शोषित और पीड़ित मनरेगा कर्मियों को एक नया जीवनदान दिया है। यह जीत न केवल हमारे धैर्य की है, बल्कि विधायक सुरेश बैठा जैसे जनप्रिय नेता के उस विश्वास की है जो उन्होंने हमेशा हम गरीब और संविदा कर्मियों पर बनाए रखा।
