Jharkhand Welfare Department Cycle Scheme : कांके प्रखंड में 241 विद्यार्थियों के बीच साइकिल वितरण

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द जन सभा | निरंजन भारती

झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी दूर-दराज के स्कूलों तक पहुँचना कई बच्चों के लिए पढ़ाई छोड़ने की एक बड़ी वजह बन जाता है. इसी चुनौती से निपटने और स्कूली छात्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने की दिशा में कल्याण विभाग द्वारा कांके प्रखंड परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान मुख्य अतिथि विधायक सुरेश बैठा और उप प्रमुख अंजय बैठा ने संयुक्त रूप से 241 छात्र-छात्राओं के बीच साइकिलों का वितरण किया. लाल फीते की औपचारिकता से इतर, यह आयोजन उन सैकड़ों परिवारों के लिए राहत की साँस की तरह था, जिनके बच्चे हर दिन कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने को मजबूर थे। साइकिल हाथ में आते ही बच्चों के चेहरों पर बिखरी खिलखिलाती मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि कड़कड़ाती धूप हो या तेज बारिश या फिर देह कंपा देने वाले ठंड, लंबे पैदल रास्तों की थकान अब उनके कदमों को रोक नहीं पाएगी. जो रास्ते कल तक उनकी पढ़ाई के आड़े आते थे, आज वही दो पहिए उनके सुनहरे कल और नए सपनों की उड़ान का ज़रिया बन गए हैं.

इस अवसर पर विधायक सुरेश बैठा ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि दूरी या परिवहन के साधनों का अभाव किसी भी छात्र की पढ़ाई में रुकावट न बने। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज जब आपके पास यह साधन उपलब्ध हो गया है, तो इसे केवल एक साइकिल भर न समझें, बल्कि अपने जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने का मजबूत माध्यम बनाएँ। आप सभी प्रतिदिन विद्यालय आएँ, मन लगाकर पढ़ें और कड़ी मेहनत से अपने सपनों को साकार करें। इस साइकिल का उपयोग पूरी तरह से अपनी शिक्षा और आवश्यक कार्यों के लिए ही करें। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की यह संवेदनशीलता को दर्शाती है कि वह सिर्फ़ योजनाएँ नहीं बना रही, बल्कि सुदूरवर्ती गाँवों में पल रहे सपनों को पंख देने का काम कर रही है, ताकि अभावों से घिरी कोई भी होनहार प्रतिभा केवल कुछ किलोमीटर की दूरी के कारण अपने उज्ज्वल भविष्य से महरूम न रह जाए।

वहीं, प्रखंड उप प्रमुख अंजय बैठा ने बच्चों को पढ़ाई का सही मतलब समझाते हुए समाज की उस पुरानी कड़वी हकीकत को याद किया, जिससे गरीब परिवार बरसों से जूझते आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का असली फायदा तभी है जब उनका सही इस्तेमाल हो। उन्होंने बेहद आसान और सीधे शब्दों में कहा, यह साइकिल सिर्फ लोहे की बनी एक चीज़ नहीं है, बल्कि उस गरीबी, लाचारी और मजबूरी से लड़ने का जरिया है, जिसने न जाने कितने किसान, मजदूर, दलित और पिछड़े परिवारों के बच्चों के सपनों को अधूरा छोड़ दिया। हमारे देश के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी एक बेहद गरीब परिवार से थे। बचपन में वे अखबार बेचकर अपनी पढ़ाई का खर्च उठाते थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा के दम पर ही वे पूरी दुनिया में मिसाल बने। कलाम साहब कहते थे कि सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।’ उप प्रमुख ने आगे कहा की यह साइकिल आपके समय और थकान को बचाकर रोज़ स्कूल पहुँचने में मदद करेगी। हम बस यही चाहते हैं कि आप इसका सही उपयोग करें, रोज़ स्कूल आएँ और मन लगाकर पढ़ें। ताकि जिस गरीबी और बेबसी में आपके परिवार का कल बीता, उसे आप अपनी पढ़ाई और मेहनत के दम पर हमेशा-हमेशा के लिए बदल सकें।

इस मौके पर राजेश सिन्हा सन्नी, अख्तर हुसैन, विधायक प्रतिनिधि संजय मुंडा, लालचंद सोनी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य उपस्थित सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय कदम बताया।

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