
The Jan Sabha संवाददाता रांची : तंग गलियां, सीमित संसाधन और हिंदी माध्यम के स्कूल अमूमन सरकारी स्कूलों की यही छवि दिमाग में उभरती है। लेकिन झारखंड के नन्हे सितारों ने इस धारणा को मुंबई की चमक-धमक के बीच धूल चटा दी है।नेशनल वर्ड पावर चैंपियनशिप 2025-26′ में झारखंड के कक्षा 2 से 5 तक के बच्चों ने अपनी अंग्रेजी दक्षता (English Proficiency) का ऐसा लोहा मनवाया कि राष्ट्रीय मंच पर हर कोई दंग रह गया।
साधारण स्कूलों के असाधारण बच्चे
मुंबई में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में झारखंड के बच्चों का पहुंचना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। ये वे बच्चे हैं जिन्होंने बुनियादी शिक्षा (FLN) के तहत राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की और फिर 22 अप्रैल 2026 को नेशनल फाइनल में अपनी जगह बनाई। इनकी सफलता यह बताती है कि अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो झारखंड के सुदूर गांवों में छिपी प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर चमकने से कोई नहीं रोक सकता।
मुख्यमंत्री ने बधाई दिया और कहा शिक्षा की मजबूत नींव का परिणाम

इस ऐतिहासिक जीत पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने खुशी जाहिर करते हुए इसे राज्य के लिए गर्व का पल बताया है। उन्होंने कहा, नन्हें बच्चों का राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना राज्य में शिक्षा की मजबूत नींव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने इस सफलता का श्रेय बच्चों की मेहनत के साथ-साथ उन समर्पित शिक्षकों और अभिभावकों को भी दिया, जिन्होंने संसाधनों की कमी को कभी आड़े नहीं आने दिया। सरकार ने दोहराया कि उनका लक्ष्य सरकारी स्कूलों को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करना है।
LeapForWord और सरकार का सफल ‘तालमेल
इस सफलता के पीछे ‘झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद’ और उनके इंग्लिश लिटरेसी पार्टनर ‘LeapForWord’ का एक सुनियोजित प्रयास है। ‘फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी’ (FLN) के माध्यम से प्राथमिक स्तर के बच्चों में अंग्रेजी पढ़ने और समझने की क्षमता विकसित की गई। इस मॉडल ने यह साबित कर दिया कि भाषा अब झारखंड के बच्चों के लिए बाधा नहीं, बल्कि उनकी ताकत बन रही है।
अब गांव के बच्चे भी दे रहे हैं चुनौती
सरकारी स्कूलों की यह बदलती तस्वीर एक बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत है। राज्य के दूरस्थ जिलों के बच्चे, जो कभी महानगरों का सपना देखने से भी कतराते थे, आज वहां जाकर पदक जीत रहे हैं। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों के आत्मविश्वास की जीत है जो मानते हैं कि कड़ी मेहनत और सही दिशा से किसी भी वैश्विक चुनौती का सामना किया जा सकता है।
