जमशेदपुर हत्याकांड: जमशेदपुर-सरायकेला में एसपी के तबादलों पर उठे सवाल, पुलिस एसोसिएशन ने सरकार को घेरा

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द जन सभा | निरंजन भारती

जमशेदपुर में पिछले दिनों हुए उपद्रव और चाकूबाजी की घटना के बाद सरकार द्वारा जमशेदपुर और सरायकेला के पुलिस कप्तानों के आनन-फानन में किए गए तबादलों पर अब राजनीति और प्रशासनिक हलकों में बहस छिड़ गई है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने इस कार्रवाई पर गहरी असंतोष व्यक्त किया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने साफ कहा है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग शासन की एक सामान्य प्रक्रिया है और इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन केवल चेहरे बदल देने से कानून-व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त नहीं हो सकती। उन्होंने इसे अपराधियों के खिलाफ एक शॉर्टकट कार्रवाई करार दिया है।

तबादला समाधान नहीं

एसोसिएशन का मानना है कि राज्य में उपद्रवियों और अपराधियों द्वारा पैदा की जा रही असामाजिक समस्याओं का परमानेंट इलाज सिर्फ अधिकारियों को हटाना नहीं है। केवल प्रशासनिक फेरबदल से समाज में यह संदेश नहीं जाता कि कानून का राज स्थापित हो गया है। असली जरूरत इस बात पर आत्ममंथन करने की है कि ग्राउंड जीरो पर पुलिस किन परिस्थितियों में काम कर रही है। अपराधियों और उपद्रवियों के हौसले पस्त करने के लिए उनकी मानसिक विकृति पर कठोरतम कानूनी प्रहार होना चाहिए, न कि अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जाना चाहिए।

पीसीआर में कम जवान

जमशेदपुर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र करते हुए पुलिस एसोसिएशन ने मैदानी हकीकत को उजागर किया है। घटना के वक्त मौके पर मौजूद पीसीआर वैन में महज 2 से 3 पुलिसकर्मी तैनात थे। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे सवाल किया है कि इतनी कम संख्या में पुलिस के जवान 10 से 20 हथियारबंद गुंडों और उपद्रवियों का सामना आखिर कैसे कर सकते हैं? पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, जो सीमित संसाधनों, अपर्याप्त संख्या बल और कानूनी सीमाओं के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर चौबीसों घंटे ड्यूटी पर मुस्तैद रहते हैं।

डीजीपी से उम्मीदें

एसोसिएशन ने राज्य के पुलिस महानिदेशक की कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए उनसे भी अपील की है। उन्होंने कहा कि झारखंड पुलिस के ईमानदार और कुशल नेतृत्वकर्ता डीजीपी को यह जमीनी हकीकत विनम्रतापूर्वक सरकार तक पहुंचानी चाहिए। राज्य की पुलिस को इस वक्त सिर्फ आदेशों की नहीं, बल्कि अधिक सशक्त और साधन-संपन्न बनाने की जरूरत है। जब तक पुलिस बल को बुनियादी रूप से मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे तात्कालिक प्रशासनिक फेरबदल बेअसर साबित होते रहेंगे।

ठोस नीति की मांग

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व की सराहना करते हुए एसोसिएशन ने याद दिलाया कि जिस तरह राज्य से उग्रवाद का लगभग सफाया कर दिया गया, ठीक उसी तर्ज पर इन शहरी अपराधियों और असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए भी एक ठोस नीति की जरूरत है। इसके लिए सबसे पहले पुलिस का संख्या बल बढ़ाना होगा, उन्हें आधुनिक हथियारों व संसाधनों से लैस करना होगा और फील्ड में तैनात जवानों के अधिकारों को सुदृढ़ करना होगा ताकि वे उपद्रवियों के सामने खुद को लाचार महसूस न करें।

दूरगामी कदम उठाने की अपील

झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकारियों से विनम्र आग्रह किया है कि वे इस तात्कालिक प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्रिया से ऊपर उठें। सरकार को पुलिस बल को बुनियादी रूप से मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक और दूरगामी कदम उठाने चाहिए। एसोसिएशन का कहना है कि जब तक पुलिस को अंदरूनी तौर पर मजबूत और साधन-संपन्न नहीं बनाया जाएगा, तब तक भविष्य में उपद्रवियों और अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे और वे कानून को हाथ में लेने का दुस्साहस करते रहेंगे।

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