
The Jan Sabha, हजारीबाग संवाददाता: आशीष कुमार साव
हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित पकरी बरवाडीह के प्राचीन मेगालिथ (महापाषाण कालीन स्थल) को अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य के पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने बुधवार को इस ऐतिहासिक स्थल का दौरा किया। उन्होंने यहाँ की अद्वितीय खगोलीय संरचनाओं का अवलोकन किया और इस धरोहर को संरक्षित करते हुए पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने के लिए जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

करीब 3000 से 4000 वर्ष पुराने ये पत्थर स्मारक न केवल प्राचीन इतिहास के गवाह हैं, बल्कि आदिवासी समुदाय की उन्नत खगोलीय समझ का एक विस्मयकारी उदाहरण भी पेश करते हैं। यह स्थल एक प्रागैतिहासिक वेधशाला के रूप में जाना जाता है। हर साल 21 मार्च और 23 सितंबर को ‘विषुव’ (इक्विनॉक्स) के दिन यहाँ अद्भुत नजारा दिखता है, जब उगते सूर्य की किरणें इन विशाल पत्थरों के बीच से ठीक एक सीधी रेखा में गुजरती हैं। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए देश-विदेश के शोधार्थी और पर्यटक यहाँ पहुँचते हैं।

स्थल का मुआयना करने के बाद सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि पकरी बरवाडीह का यह मेगालिथ स्थल झारखंड की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत है। उन्होंने कहा, सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इस स्थल के ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए इसे विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है। यहाँ बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय पर्यटक और शोधकर्ता सुगमता से यहाँ पहुँच सकें। इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए विभाग ठोस कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

वहीं लंबे समय से इस स्थल पर शोध कर रहे प्रसिद्ध शोधकर्ता और वैज्ञानिक शुभाशीष दास ने मेगालिथ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, यह केवल पत्थरों का समूह नहीं, बल्कि प्राचीन भारत की एक परिष्कृत वेधशाला है। विषुव के दिन सूर्य की किरणों का इन पत्थरों के संरेखण (Alignment) से गुजरना यह सिद्ध करता है कि हमारे पूर्वजों को खगोल विज्ञान और गणित की गहरी जानकारी थी। यदि इसे सही तरीके से संरक्षित और प्रचारित किया जाए, तो यह स्थल ‘स्टोनहेंज’ की तर्ज पर दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।

दौरे के दौरान सचिव के साथ विभागीय अधिकारी और जिला प्रशासन की टीम भी मौजूद रही। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि स्थल के सौंदर्यीकरण और आने जाने की रास्ते को बेहतर बनाने के लिए जल्द ही कदम उठाए जाएंगे, ताकि स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल सके।
