RINPAS NEWS: रिनपास में डॉक्टर्स डे पर खुलेआम उड़ाई गईं मेडिकल नियमों की धज्जियां ?

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द जन सभा | निरंजन भारती

झारखंड के प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थान रिनपास RINPAS में नेशनल मेडिकल कमीशन NMC के नियमों को ताक पर रखकर एक निजी ज्वैलरी कंपनी को बढ़ावा देने का एक गंभीर मामला सामने आया है। डॉक्टर्स डे के मौके पर प्रभारी निदेशक के कार्यालय में न केवल एक निजी ज्वैलरी कंपनी का केक काटा गया जिस पर कंपनी का नाम साफ देखा जा सकता है बल्कि अस्पताल परिसर के भीतर ही गहनों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सरकारी डॉक्टर ज्वैलरी कंपनी के प्रतिनिधियों से सोने की कीमत और मेकिंग चार्ज पर चर्चा करते दिख रहे हैं। वहीं, मेज पर रखे सोवेनियर पर भी उसी ज्वैलरी ब्रांड का नाम चमक रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह प्रशासनिक रसूख और दबाव में अंजाम दिया गया, इसका सबसे बड़ा सबूत रिनपास के निदेशक कार्यालय से जारी वह आधिकारिक आदेश पत्र है, जो इस वक्त चर्चा के केंद्र में है। रिनपास के आधिकारिक पत्र संख्या 1612 , दिनांक 01/07/2026 के जरिए संस्थान की प्रभारी निदेशक ने डॉक्टर्स डे के उपलक्ष्य में एक बैठक बुलाई थी। इस सरकारी पत्र में बैठक का कोई ठोस चिकित्सकीय या प्रशासनिक एजेंडा स्पष्ट नहीं किया गया था। इसके बावजूद, पत्र में बेहद कड़े शब्दों में आदेश जारी करते हुए लिखा गया था कि उक्त बैठक में आपकी उपस्थिति अनिवार्य है।

हैरानी की बात यह है कि इस सरकारी आदेश की प्रति रिनपास के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनोद कुमार महतो और उप-चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पी.के. साह सहित कुल 18 वरिष्ठ डॉक्टरों, मनोचिकित्सकों और विशेषज्ञों को नामज़द करके भेजी गई थी, ताकि कोई भी इस आयोजन से बच न सके। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि किसी संवेदनशील सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों को एक निजी सोने-चांदी की कंपनी के प्रचार-प्रसार के लिए आधिकारिक आदेश जारी कर बुलाना सीधे तौर पर हितों के टकराव Conflict of Interest और पद के घोर दुरुपयोग का मामला है।

नेशनल मेडिकल कमीशन NMC की आचार संहिता और नियमों के अनुसार, कोई भी पंजीकृत डॉक्टर या सरकारी अस्पताल का प्रशासनिक प्रमुख किसी भी व्यावसायिक कंपनी चाहे वह कोई दवा/ फार्मा कंपनी हो या अन्य कोई कमर्शियल ब्रांड उससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ नहीं ले सकता। नियम स्पष्ट कहते हैं कि डॉक्टर ऐसी कंपनियों की किसी निजी बैठक या कमर्शियल इवेंट में शामिल नहीं हो सकते, और न ही उनसे किसी भी तरह का उपहार, यात्रा सुविधाएं, आतिथ्य, नकद या गिफ्ट वाउचर स्वीकार कर सकते हैं। इसके बावजूद, रिनपास में बकायदा लिखित आदेश जारी कर डॉक्टरों को जुटाया गया और रिम्स सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान उनके बीच शॉल, महंगे गिफ्ट और मिठाइयों का वितरण किया गया, जो एनएमसी की गाइडलाइंस का सरेआम और सीधा उल्लंघन है।

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब रिनपास की प्रभारी निदेशक विवादों के घेरे में आई हैं। उन पर पूर्व में एक मरीज को अपनी गाड़ी से रौंदने का बेहद गंभीर आरोप लग चुका है, और वह फिलहाल इस मामले में अदालत से जमानत पर बाहर हैं। इस मामले की न्यायिक जांच भी चल रही है। इसके बावजूद, स्वास्थ्य विभाग द्वारा उन्हें प्रभारी निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर बनाए रखना और एसीबी Anti-Corruption Bureau कोर्ट के आदेश के बाद भी उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की फाइल को दबाकर रखना, राज्य के स्वास्थ्य महकमे की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों और सूत्रों का कहना है कि इस घटना के बाद संस्थान के भीतर दबे स्वर में इस मनमानी का विरोध शुरू हो गया है, लेकिन निदेशक की ऊंची पहुंच और रसूख के डर से कोई भी खुलकर सामने आने को तैयार नहीं है। इस पूरे मामले पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की खामोशी सबसे हैरान करने वाली है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या रिनपास में मचे इस घमासान और ज्वैलरी कंपनी की यह खनक स्वास्थ्य मंत्री के कानों तक नहीं पहुंच रही है? क्या वे इस पूरी धांधली से बेखबर हैं, या फिर सब कुछ जानते हुए भी भ्रष्टाचारियों को मौन संरक्षण दिया जा रहा है?

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