Tribal Delimitation News: परिसीमन के विवाद पर कांग्रेस प्रभारी से मिला आदिवासीयों का प्रतिनिधिमंडल

आदिवासी जन सभा विशेष झारखंड
Share Now

झारखंड में परिसीमन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा परिसीमन को लेकर झारखंड के आदिवासी समाज ने अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। रविवार को रांची के राज्य अतिथि गृह में विभिन्न सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के झारखंड प्रभारी के. राजू से मुलाकात की। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने परिसीमन के दौरान अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों को सुरक्षित रखने और उनमें समानुपातिक वृद्धि करने की मांग उठाई है।

राहुल गांधी से मुलाकात और रांची में महाजुटान रैली की तैयारी

बैठक के दौरान पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने एआईसीसी प्रभारी से अनुरोध किया कि वे इस गंभीर विषय पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ प्रतिनिधिमंडल की एक आपात बैठक सुनिश्चित कराएं। इसके साथ ही, प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी को आगामी 30 अगस्त 2026 को रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित होने वाली ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का न्योता भी दिया। बंधु तिर्की ने भरोसा जताया कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से आदिवासियों के अधिकारों के साथ खड़ी रही है, इसलिए आगामी परिसीमन में भी सीटों की सुरक्षा तय होनी चाहिए।

संविधान संशोधन के जरिए सीटों में 50 फ़ीसदी बढ़ोतरी की मांग

अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना ने सीटों की सुरक्षा के लिए एक ठोस कानूनी फॉर्मूला पेश किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में आदिवासी सीटों को सुरक्षित रखने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) में आवश्यक संशोधन किया जाना बेहद जरूरी है। उनका सुझाव है कि यदि आगामी परिसीमन के तहत देशभर में लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाती है, तो उसी अनुपात में एसटी और एससी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी 50 प्रतिशत बढ़ाई जानी चाहिए ताकि उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर न हो।

कानूनी विशेषज्ञों का तर्क और एआईसीसी प्रभारी का आश्वासन

बैठक में झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषिश रशीक सोरेन और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ के सहायक प्राध्यापक डॉ. रामचंद्र उरांव ने परिसीमन के विधिक पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने बताया कि जरूरी संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से आदिवासी सीटों की सुरक्षा पूरी तरह संभव है। प्रतिनिधिमंडल की चिंताओं को सुनने के बाद एआईसीसी प्रभारी के. राजू ने आश्वासन दिया कि वे इन मांगों को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाएंगे और राहुल गांधी के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने सहमति जताई कि कुल सीटें बढ़ने पर आरक्षित सीटों में भी समानुपातिक वृद्धि होनी चाहिए।

जनगणना में सरना धर्म कोड लागू करने की मांग भी उठी

इस महत्वपूर्ण बैठक में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के अलावा आदिवासियों की धार्मिक पहचान का मुद्दा भी प्रमुखता से गूंजा। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक जनगणना में ‘सरना धर्म कोड’ लागू नहीं किया गया है, जिससे आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से आग्रह किया कि इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर संसद और अन्य मंचों पर पुरजोर तरीके से उठाया जाए। बैठक के समापन पर अजय तिर्की ने सभी प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *