Ranchi News: उपायुक्त ने की स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के प्रबंधकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक, दिए कड़े निर्देश

जन सभा विशेष झारखंड
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नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों का एफिलिएशन होगा रद्द, शव रोकने पर दर्ज होगी FIR: DC MANJUNATH BHAJANTRI

द जन सभा निरंजन भारती

उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने शनिवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिले के निजी अस्पतालों के प्रबंधकों, प्रतिनिधियों और इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य रूप से सिविल सर्जन प्रभात कुमार, जिला पंचायती राज पदाधिकारी-सह-हेल्थ नोडल पदाधिकारी राजेश साहू और जिला समन्वयक आयुष्मान भारत योजना सहित स्वास्थ्य विभाग के कई आला अधिकारी उपस्थित रहे।

​बैठक में उपायुक्त ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अस्पतालों में लगे इलेक्ट्रिकल वायरिंग, चिकित्सा उपकरणों, आईसीयू में संचालित एसी और जेनरेटर का विशेषज्ञों से नियमित रूप से ऑडिट कराया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की शॉर्ट-सर्किट या अगलगी जैसी दुर्घटना की संभावना को पूरी तरह रोका जा सके। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिले में गिरते लिंगानुपात पर चिंता जताते हुए उपायुक्त ने संचालित सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को लिंग निर्धारण संबंधी कानून (PCPNDT Act) का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी भी सेंटर की संलिप्तता लिंग निर्धारण जैसे अवैध और सामाजिक रूप से घातक कार्य में पाई जाती है, तो संबंधित संस्थान को सील करते हुए दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को अपने निबंधन (रजिस्ट्रेशन) की वैधता समाप्त होने से पहले ही नवीकरण (रिन्यूअल) के लिए आवेदन करने की हिदायत दी गई।

​बैठक के दौरान उपायुक्त ने कुछ निजी अस्पतालों द्वारा इलाज का बकाया बिल न चुका पाने पर मरीजों के शव को रोके जाने की गंभीर शिकायतों पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पैसे के अभाव में शव को परिजनों को न सौंपना राज्य सरकार के स्पष्ट आदेशों और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने सभी अस्पतालों को कानून और राज्य सरकार के निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की चेतावनी दी और कहा कि ऐसी शिकायत दोबारा मिलने पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाएगी।

​प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने अस्पतालों को किए जाने वाले भुगतानों की स्थिति को देखा। उन्होंने सभी संबद्ध अस्पतालों को स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन के अनुसार ही इलाज और क्लेम की प्रक्रियाओं को पूरा करने का निर्देश दिया ताकि भुगतान की प्रक्रिया में देरी न हो और इसे शीघ्र पूरा किया जा सके। साथ ही चेतावनी दी कि आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले या मरीजों को परेशान करने वाले अस्पतालों का एफिलिएशन (मान्यता) तुरंत रद्द कर दिया जाएगा।

​मौसमी और संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को लेकर भी बैठक में रणनीति बनाई गई। उपायुक्त ने जिले के सभी छोटे-बड़े अस्पतालों को निर्देश दिया कि वे अपने यहां आने वाले डेंगू, मलेरिया, टीबी और अन्य संक्रामक बीमारियों से संबंधित मरीजों की डेटा रिपोर्टिंग समय पर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग, दवा छिड़काव और बीमारी की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम समय रहते उठाए जा सकें।

कचरा प्रबंधन पर बात करते हुए उपायुक्त ने सभी अस्पताल प्रबंधनों को बायो-मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल में निर्धारित प्रदूषण मानकों और सरकारी नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने अस्पतालों में कार्यरत सभी डॉक्टर्स और पैरा-मेडिकल स्टाफ के शैक्षणिक व पेशेवर प्रमाण पत्रों की नियमित जांच (वेरिफिकेशन) करने को कहा ताकि किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे। उन्होंने डॉक्टरों और स्टाफ को मरीजों व उनके तीमारदारों के साथ हमेशा शालीन, विनम्र और संवेदनशील व्यवहार रखने की विशेष हिदायत दी।

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