
चतरा:जिला ब्यूरो,कुन्दन पासवान: औद्योगिक नगरी टंडवा की बदहाली की बात कर रहा हूँ,दमनीति और तरस जिंदगी जीनों को आम पब्लिक मजबूर हैं,यह बात जेएमएम नेता जागेश्वर दास ने बताया आगे कहा कि यह मजबूरी लोगों को क्या नहीं करवा रहा है,सड़कों पर बिछ रहा ‘काल’: एनटीपीसी टंडवा से निकलने वाली जहरीली फ्लाई ऐश अब ग्रामीणों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। मानकों को ताक पर रखकर की जा रही ढुलाई ने मुख्य मार्गों को डस्टबिन बना दिया है।
बीमारियों का अंबार : हाइवा और ट्रकों से गिरता गीला कीचड़ सूखने के बाद जहरीली धूल बनकर हवा में घुल रहा है। इससे इलाके में दमा, फेफड़ों का संक्रमण और आंखों की बीमारियां महामारी की तरह फैल रही है। किसानों द्वारा उपज करने वाली फसल भी अब बंजर के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशासनिक मिलीभगत का आरोप: टंडवा शहीद चौक जैसे व्यस्त इलाकों से ओसेल कोल ट्रांसपोर्टिंग तथा राख़ ढुलाई करने वाले वाहनों ने दिन-रात नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जेएमएम नेता जागेश्वर दास और ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि डिटीआओ , आरटीओ और जिला प्रशासन की ‘चुप्पी’ के पीछे बिचौलियों और नेताओं का “मैनेजमेंट” खेल है।
नियमों को ठेंगा दिखाती कंपनियां: सौरभ सागर, नवकर, रिटोरिक, बीकेबी, मेदी और एनकेएएस (नकाश) जैसी कंपनियां बिना किसी डर के ओवरलोड और असुरक्षित तरीके से राख का परिवहन कर रही है।
हादसों को दावत: सड़क पर जमा और धूल के कारण बाइक सवार लगातार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। सफाई के नाम पर इन कंपनियां सिर्फ खानापूर्ति कर रही है।
आंदोलन की सुलगती चिंगारी, वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी से जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। वर्तमान में उड़सू मोड़ से चुंदरु मोड़ तक वाहनों की लंबी कतारें आये दिन लगी रहती है और ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन व सड़क जाम की चेतावनी भी दी है।
बड़ा सवाल : क्या जिला अधिकारी बड़ी महामारी या भीषण सड़क हादसे के बाद भी हरकत में क्यों नहीं आ रहे,क्या घटना होती रहेगी और जिला प्रशासन इंतजार करता रहेगा? फाइलों में सिमटी कार्रवाई धरातल पर कब उतरेगी?आख़िर खानापूर्ति कारवाई कब तक?।
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