द जन सभा
बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी) मेसरा और भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर (NESAC) ने एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों (Geospatial Technologies), GeoAI अनुसंधान, रिमोट सेंसिंग और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूत करना है। बीआईटी मेसरा परिसर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान दोनों संस्थानों के प्रमुखों और वैज्ञानिकों की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

छात्रों के लिए खुलेंगे नए रास्ते, वैज्ञानिकों का मिलेगा साथ
इस पांच वर्षीय समझौते के तहत दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे, जिससे विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्र के छात्रों के लिए शैक्षणिक पहुंच आसान होगी। समझौते के मुताबिक, NESAC के वैज्ञानिक बीआईटी मेसरा के रीसर्च स्कॉलर्स का संयुक्त सुपरविज़न (गाइडेंस) करेंगे। इसके अलावा, दोनों संस्थानों के बीच छात्रों के लिए इंटर्नशिप, अनुसंधान का आदान-प्रदान, गेस्ट फैकल्टी की भागीदारी और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इस पहल से मास्टर्स और पीएचडी प्रोग्रामों में रिमोट सेंसिंग, जीआईएस और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे विषयों का विस्तार होगा।
डेटा और विशेषज्ञता साझा करेंगे दोनों संस्थान
इस साझेदारी के तहत NESAC संयुक्त शोध कार्यों के लिए अपना भू-स्थानिक डेटाबेस, सैटेलाइट इमेजरी, मौसम संबंधी डेटासेट और तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेगा। दूसरी ओर, बीआईटी मेसरा इंजीनियरिंग और रिमोट सेंसिंग डोमेन में क्षमता निर्माण, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान और प्रशिक्षण प्रोग्रामों में अपना योगदान देगा। दोनों संस्थान मिलकर धरती के प्रेक्षण चित्रों (Earth Observation Imagery) और उभरती भूस्थानिक तकनीकों पर केंद्रित सेमिनार और कार्यशालाएं भी आयोजित करेंगे।
सामाजिक विकास और अनुसंधान में साबित होगा मील का पत्थर
कार्यक्रम के दौरान NESAC के डायरेक्टर डॉ. एस.पी. अग्रवाल ने दोनों संस्थानों के पुराने संबंधों को याद करते हुए कहा कि यह संयुक्त प्रयास तकनीकी विकास और सामाजिक ऐप्लीकेशन्स में बेहद कारगर साबित होगा। इस समझौते के तहत NESAC के वैज्ञानिकों को बीआईटी मेसरा में पार्ट-टाइम मास्टर्स और डॉक्टोरल प्रोग्राम करने का अवसर भी मिल सकेगा।
