
The Jan Sabha संवाददाता रांची: झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के दौरान श्रद्धा का एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। कथा के छठवें दिन लगभग आठ लाख श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव और श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयघोष से गुंजायमान हो गया। पूज्य गुरुदेव के भक्तिमय प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को धर्म और आस्था के सूत्र में बांधे रखा।
कथा के दौरान गुरुदेव ने पशुपति व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करता है, तो उसके जीवन की कठिन से कठिन बाधाएं दूर हो जाती हैं। उन्होंने अपने प्रसिद्ध मंत्र एक लोटा जल, सब समस्याओं का हल को दोहराते हुए कहा कि महादेव पर अर्पित किया गया जल कभी व्यर्थ नहीं जाता। गुरुदेव ने बताया कि सच्चे भाव से शिव की आराधना करने वाले भक्तों का मार्ग भगवान गणेश स्वयं प्रशस्त करते हैं।

प्रवचन के दौरान कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कई प्रेरक प्रसंग साझा किए। उन्होंने धनबाद के एक व्यक्ति की कहानी सुनाई जिसकी किडनी गंभीर रूप से खराब थी, लेकिन पशुपति व्रत और अटूट विश्वास के बाद वह स्वस्थ हो गया। इसी तरह, पुलिस सेवा में चयनित दो युवतियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि मेहनत के साथ ईश्वर की कृपा जुड़ जाए तो सफलता निश्चित है। एक दंपत्ति, जिन्हें विवाह के 25 साल बाद संतान सुख मिला, उनके प्रसंग ने पूरे पंडाल को भावुक कर दिया।
गुरुदेव ने जीवन दर्शन पर बात करते हुए कहा कि “सिद्ध होना सरल है, लेकिन शुद्ध होना कठिन है।” उन्होंने श्रद्धालुओं को सीख दी कि केवल उपलब्धियों के पीछे भागने के बजाय अपने विचारों और व्यवहार की शुद्धता पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा ही मनुष्य को जीवन की नैया पार लगाने की शक्ति प्रदान करती है।

कथा में दुंदुभीनिर्ह्राद वध का प्रसंग विशेष आकर्षण रहा। गुरुदेव ने बताया कि जब दैत्य दुंदुभी ने बाघ का रूप धरकर धर्म और ऋषि-मुनियों का विनाश करना चाहा, तब भगवान शिव शिवलिंग से प्रकट हुए और उसका वध किया। इसी स्थान पर व्याघ्रेश्वर लिंग की स्थापना हुई। गुरुदेव ने कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब महादेव अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी न किसी रूप में अवश्य प्रकट होते हैं।

उमड़ी जनसैलाब को देखते हुए आयोजन समिति और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लाखों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने इतनी बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के सहयोग के लिए प्रशासन और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया है।
