
The Jan Sabha संवाददाता, कांके : राजधानी के कांके स्थित सुकुरहुटू गौशाला मैदान में इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। श्री शिवाला समिति के तत्वावधान में आयोजित Pandit Pradeep Mishra की शिव महापुराण कथा के छठवें दिन रविवार को भक्तों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि मैदान छोटा पड़ गया। देश के कोने-कोने से आए लाखों श्रद्धालुओं ने इस भीषण गर्मी के बावजूद पूरे उत्साह के साथ महादेव की महिमा का श्रवण किया।

5 मई से जारी इस सात दिवसीय कथा में रविवार की छुट्टी होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से कहीं अधिक हो गई। सुबह से ही पंडाल खचाखच भर चुका था और देखते ही देखते पूरा फुटबॉल मैदान शिव भक्तों से पट गया। आलम यह था कि पैर रखने तक की जगह शेष नहीं रही, फिर भी भक्तों का अनुशासन और श्रद्धा देखते ही बनती थी।

लाखों की इस भारी भीड़ को बिना किसी अप्रिय घटना के संभालना रांची पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। रांची एसडीओ, डीएसपी अमर कुमार पांडेय और इंस्पेक्टर कुणाल कुमार के नेतृत्व में सैकड़ों जवानों ने मुस्तैदी से मोर्चा संभाला। भीषण गर्मी और उमस के बीच, जहां आम लोग छांव की तलाश कर रहे थे, वहीं पुलिस के जवान तपती धूप और तेज बारिश में भी घंटों डटे रहे ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे।

मैदान में पुलिसकर्मी केवल रक्षक नहीं, बल्कि सेवादार की भूमिका में नजर आए। बुजुर्गों को सहारा देना, प्यासे श्रद्धालुओं को पानी उपलब्ध कराना और रास्ता भटक गए बच्चों को उनके परिजनों से मिलाना पुलिस के इस मानवीय चेहरे ने जनता का दिल जीत लिया। डीएसपी अमर कुमार पांडेय और इंस्पेक्टर कुणाल कुमार स्वयं जमीन पर उतरकर स्थिति को नियंत्रित करते दिखे। पुलिस की सटीक क्राउड मैनेजमेंट रणनीति का ही परिणाम था कि प्रवेश से लेकर निकास तक कहीं भी अफरा-तफरी की स्थिति पैदा नहीं हुई।

इस अवसर पर डीएसपी अमर कुमार पांडेय ने कहा कि भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और जवानों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ अपनी ड्यूटी निभाई। वहीं, इंस्पेक्टर कुणाल कुमार ने बताया कि स्थानीय लोगों और आयोजन समिति के सहयोग से इतनी बड़ी संख्या को संभालना आसान हुआ।

हमारे संवाददाता ने जब कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं से बात की, तो उनकी आंखों में संतोष और पुलिस के प्रति गहरा सम्मान दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश से आए एक श्रद्धालु और स्थानीय महिलाओं के समूह ने भावुक होते हुए कहा, हम इतनी दूर से आए थे और मन में डर था कि लाखों की इस भीड़ में कहीं कोई अनहोनी न हो जाए या धक्का-मुक्की में परिवार बिछड़ न जाए। लेकिन यहां की पुलिस का व्यवहार किसी रक्षक की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसा दिखा। भीषण गर्मी में जब गला सूख रहा था, तब कई जवानों को खुद पानी के इंतजाम में मदद करते देखा।

सबसे बड़ी बात यह रही कि इतनी भीड़ के बावजूद किसी भी पुलिसकर्मी ने न तो आवाज ऊंची की और न ही कड़ा रुख अपनाया, वे मुस्कुराकर और हाथ जोड़कर लोगों को रास्ता बताते रहे। धूप में तपते हुए जवानों को देखकर ऐसा लग रहा था कि वे ड्यूटी नहीं, बल्कि स्वयं महादेव की सेवा कर रहे हैं। पुलिस की इसी मुस्तैदी और नरम व्यवहार के कारण ही हम बिना किसी डर के शांतिपूर्वक भगवान की कथा सुन पाए।

