द जन सभा | निरंजन भारती
झारखंड में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के संभावित परिसीमन को लेकर आदिवासी संगठनों ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को रांची में हुई एक अहम बैठक में इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनी कि परिसीमन से आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों पर आंच आ सकती है। इसके विरोध में अगस्त 2026 में रांची के मोरहाबादी मैदान में एक ऐतिहासिक आदिवासी एकता महाजुटान रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राज्य के सभी 24 जिलों से लाखों लोगों को जुटाने का लक्ष्य है।

आदिवासी वजूद पर हमला
बैठक में शामिल विभिन्न आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने केंद्र सरकार की परिसीमन नीति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। वक्ताओं का कहना था कि यदि जनसंख्या को मुख्य आधार बनाया गया, तो झारखंड में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या घट सकती है। आंदोलनकारियों ने साफ किया कि पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित क्षेत्रों की विशेष स्थिति और आदिवासियों के ऐतिहासिक राजनीतिक अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए गांव और पंचायत स्तर पर जागरूकता रथ रवाना किए जाएंगे।
सीटें घटीं तो बर्दाश्त नहीं करेंगे: अजय तिर्की
केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष अजय तिर्की ने बैठक के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, परिसीमन के नाम पर आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी को कम करने की साजिश रची जा रही है। अगर हमारी आरक्षित सीटें घटाई गईं, तो आदिवासी समाज इसे चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगा। यह हमारे वजूद और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है। हम अपनी जमीन और राजनीतिक ताकत को बचाने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, और अगस्त की महाजुटान रैली दिल्ली के हुक्मरानों को हमारी ताकत का अहसास कराएगी।
आईटी सेल और वार रूम का गठन
आंदोलन को धार देने और इसे पूरे राज्य में प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए कई विशेष समितियों का गठन किया गया है। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और डिजिटल मोर्चे को संभालने के लिए एक विशेष आईटी सेल और केंद्रीय वार रूम बनाया गया है। इसके अलावा, मीडिया से तालमेल के लिए राज्य स्तर पर पांच प्रवक्ताओं और सभी 24 जिलों में जिला समन्वयकों की नियुक्ति का फैसला हुआ है, जो जमीनी स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाएंगे।
राष्ट्रपति और राहुल गांधी से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
आदिवासी समाज ने अपनी इस लड़ाई को सिर्फ राज्य तक सीमित न रखकर देश की राजधानी तक ले जाने का फैसला किया है। बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय कानून मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से मुलाकात करेगा। यह प्रतिनिधिमंडल झारखंड के आदिवासी समाज की चिंताओं को उनके सामने रखेगा और संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेगा।
मंच पर जुटे झारखंड के दिग्गज आदिवासी चेहरे
रणनीतिक बैठक में झारखंड के आदिवासी समाज के कई बड़े चेहरे और मुखर आवाजें एक मंच पर नजर आईं। बैठक में मुख्य रूप से पूर्व मंत्री बंधु तिर्की, पूर्व मेयर रमा खलखो, शशि पन्ना, केंद्रीय सरना समिति के अजय तिर्की, मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग, बिनसाय मुंडा, राजेश लिंडा, अनिल अमिताभ पन्ना, सुषमा बिरुरी, लक्ष्मी नारायण मुंडा, वाल्टर कांडुलना, शिवा कच्छप और अनिल उरांव सहित दर्जनों बुद्धिजीवी मौजूद थे।
