मगध-अम्रपाली में कौन करवा रहा है कोयले की चोरी? CISF की कार्रवाई के बाद मचा हड़कंप, सुरक्षा से लेकर पुलिस-प्रशासन तक कटघरे में

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द जन सभा | टंडवा, चतरा

रात का अंधेरा, कोयला क्षेत्र की सड़कें और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच मगध-अम्रपाली कोयला क्षेत्र में CISF की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। CISF ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर बताया है कि मगध क्षेत्र में फुलवरिया साइडिंग के पीछे करीब 200 टन कोयला जब्त किया गया है। CISF के मुताबिक, मगध-अम्रपाली और एनके पिपरवार की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की और 19 सितंबर 2026 को क्षेत्र में CISF की औपचारिक तैनाती के बाद यह पहली बड़ी कार्रवाई है। लेकिन अब सवाल सिर्फ 200 टन कोयला बरामद होने का नहीं है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में कोयला वहां पहुंचा कैसे, इसे किसने वहां जमा किया, यह कितने समय से जमा था और इसे आगे कहां भेजे जाने की तैयारी थी। अगर कोयला परियोजना क्षेत्र से बाहर निकालकर वहां जमा किया गया था तो सुरक्षा व्यवस्था की कौन-सी कड़ी टूटी और अगर इसे किसी दूसरे स्थान से लाकर जमा किया गया था तो इतनी बड़ी मात्रा में कोयला लाने वाले वाहनों की निगरानी कहां थी। इस मामले में CCTV फुटेज, गेट एंट्री, वाहन रिकॉर्ड और सुरक्षा गश्ती रिपोर्ट अहम कड़ी साबित हो सकते हैं।

CISF की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों से बातचीत में कुछ लोगों ने दावा किया है कि क्षेत्र में कथित अवैध कोयला कारोबार कोई नई बात नहीं है और रात के समय भारी वाहनों के जरिए कोयला बाहर भेजे जाने की चर्चा लंबे समय से होती रही है। कुछ लोगों ने प्रतिदिन बड़ी संख्या में हाईवा के आने-जाने का दावा भी किया है और कहा है कि कथित तौर पर कोयला झारखंड से बाहर दूसरे राज्यों की मंडियों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसी वजह से इन दावों को तथ्य मानने के बजाय जांच का विषय माना जाना चाहिए। अगर वास्तव में इतने बड़े पैमाने पर कोयले से लदे वाहन निकलते हैं तो सवाल यह है कि वे किन रास्तों से गुजरते हैं, किन थाना क्षेत्रों से होकर जाते हैं, रास्ते में उनकी जांच कौन करता है और जांच के बावजूद कथित अवैध कोयला बाहर कैसे पहुंचता है। कुछ कथित सूत्रों ने वाहन एंट्री और प्रति टन रकम तय होने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं, यहां तक कि रकम ऊपर तक पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जांच एजेंसियां चाहें तो वाहन नंबर, CCTV फुटेज, गेट रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट, रात की गश्ती रिपोर्ट और पुराने मामलों के रिकॉर्ड की जांच कर इन दावों की सच्चाई सामने ला सकती हैं।

बरामद करीब 200 टन कोयले का स्रोत क्या है, वह किस खदान या स्टॉक से आया, उसे वहां तक कौन लेकर आया और उसका संभावित गंतव्य क्या था इन सवालों के जवाब इस पूरे मामले की तस्वीर साफ कर सकते हैं। पुलिस प्रशासन से यह पूछा जाना भी जरूरी है कि पिछले कुछ महीनों में अवैध कोयला परिवहन के कितने मामले पकड़े गए, कितने वाहन जब्त हुए और कितना कोयला बरामद किया गया। जिला खनन विभाग से भी यह जानकारी सामने आनी चाहिए कि अवैध खनन और परिवहन की शिकायतों पर कितने औचक निरीक्षण किए गए और कितनी कार्रवाई हुई। CISF ने कहा है कि वह ‘Zero Coal Leakage Policy’ के तहत आगे भी कार्रवाई जारी रखेगी। ऐसे में अब देखना यह होगा कि जांच सिर्फ साइडिंग के पीछे मिले 200 टन कोयले तक सीमित रहती है या फिर उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है, जिसके जरिए कोयले की अवैध आवाजाही की बात कही जा रही है।

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