द जन सभा | निरंजन भारती
कहते हैं कि जब किसी पुरानी और जंग लगी सरकारी मशीनरी में कोई कड़क अफसर आ जाता है, तो भ्रष्टाचारियों के महकमे में हड़कंप मचना लाजिमी है। रिनपास के उप निदेशक प्रशासन मिथिलेश कुमार चौधरी इस समय संस्थान के लिए वही सिंघम साबित हो रहे हैं। चौधरी साहब का इकलौता एजेंडा बिल्कुल साफ है रिनपास को हर तरह के भ्रष्टाचार से मुक्त करना और यहां चल रही डॉक्टरों की आंतरिक ‘गंदी राजनीति’ को हमेशा के लिए दफन कर देना। वह डॉक्टरों के चैंबर को किसी राजनीतिक दल का दफ्तर नहीं, बल्कि मरीजों के लिए एक बेहतर और शांत वातावरण बनाना चाहते हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि जब आप सिस्टम से दीमक साफ करने निकलते हैं, तो दीमकों का बौखलाना तय होता है।

शनिवार को जब मिथिलेश कुमार चौधरी ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के, पूरी पारदर्शिता के साथ चार सदस्यीय निष्पक्ष जांच समिति का गठन किया, तो रिनपास के सियासी डॉक्टरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। डॉक्टर सोलंकी का रविवार को कांके थाना में लिखित आवेदन देना इस बात को प्रमाणित करता है कि सोलंकी इस बैठक को नहीं मानते हैं ! एक प्रसिद्ध लाइन है कि जब आपको पता हो कि सामने बैठा अफसर बिकाऊ नहीं है और वह किसी सिफारिश को भाव नहीं देगा, तो आप जांच से बचने के लिए इसी तरह थाना-थाना खेलने लगते हैं। डॉक्टर सोलंकी की यह जल्दबाजी असल में चौधरी साहब की उस प्रशासनिक हनक का असर है, जिसने रिनपास के भ्रष्ट नेटवर्क की चूलें हिला दी हैं।
सवाल उठ रहा है कि रविवार की छुट्टी के दिन डॉक्टर सोलंकी पर ऐसा किसका दबाव था कि उन्हें थाने की शरण लेनी पड़ी? असल में, रिनपास में सालों से जो राजनीतिक सिंडिकेट चल रहा था, चौधरी साहब ने उस पर पूरी तरह से ‘बुलडोजर’ चला दिया है। अब जब परदे के पीछे से रिमोट कंट्रोल चलाने वाले आकाओं की दाल नहीं गल रही है, तो वे सीधे कानूनी दांवपेच का सहारा लेकर इस ईमानदार अफसर को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मिथिलेश कुमार चौधरी ने साफ कर दिया है कि रिनपास
‘हम डिगेंगे नहीं सच्चाई और कानून पर चौधरी का अटूट भरोसा
इस पूरे बवंडर के बीच भी नायक की तरह शांत और अडिग रहते हुए उप निदेशक प्रशासन मिथिलेश कुमार चौधरी ने जो बयान दिया, उसने विरोधियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि थाना जाना डॉक्टर सोलंकी का व्यक्तिगत मामला हो सकता है, लेकिन रिनपास का प्रशासन अपने नियमों से समझौता नहीं करेगा। शनिवार को गठित की गई चार सदस्यीय टीम पूरी तरह आजाद है और 15 दिनों के भीतर जैसे ही जांच रिपोर्ट आएगी, रिनपास प्रशासन बिना किसी के दबाव में आए कानून के मुताबिक सख्त से सख्त कार्रवाई करेगा। चौधरी साहब के इस सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि रिनपास में अब ‘रसूख’ नहीं, बल्कि सिर्फ ‘ईमानदारी’ चलेगी।
