द जन सभा | निरंजन भारती
रांची के होटल बीएनआर चाणक्या में विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर एक विशेष संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्य के नए स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य स्वास्थ्य विभाग की कमियों को दुरुस्त कर राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुँचाना है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि वर्तमान में झारखंड के मरीजों का पूरा बोझ अकेले रिम्स पर है। इस दबाव को कम करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से रांची में एक नए एम्स की स्थापना पर सकारात्मक चर्चा हुई है, और जल्द ही रिम्स-2 भी अस्तित्व में आएगा।

साहिया बहनों के लिए एम्बुलेंस और सदर अस्पतालों का कायाकल्प
कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कई घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली साहिया बहनों की समस्याओं को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया गया है और उनके लिए 400 छोटी एम्बुलेंस की मांग की गई है। इसके अलावा, राज्य के सभी सदर अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और उनके समर्पित वार्ड सुनिश्चित किए जाएंगे। प्रसव सुविधाओं को बेहतर करने के लिए सभी सदर अस्पतालों में सी-सेक्शन प्रसव हेतु विशेष केंद्र खोले जाएंगे। राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना हेतु निवेशकों को आमंत्रित किया जा रहा है और सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रयास जारी है। इस अवसर पर मंत्री ने अंतरा, इम्प्लांट और पीपीएफ पोस्टरों का अनावरण किया और स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले डॉक्टरों, सहियाओं व एएनएम को सम्मानित किया।
चुनौती और रोजगार के नए अवसर

डॉ. इरफान अंसारी ने इस बात पर जोर दिया कि बढ़ती हुई जनसंख्या को बेहतर संसाधन और सुविधाएं मुहैया कराना राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य बढ़ती आबादी तक न केवल स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना है, बल्कि ऐसी योजनाएं बनाना है जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हों और राज्य का समग्र विकास हो सके। उन्होंने दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर कॉनक्लेव’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विजन की सराहना की, जहाँ मेडिकल क्षेत्र में निवेश के समान अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मानव संसाधन का बेहतर उपयोग और सी-सेक्शन का विकेंद्रीकरण

कार्यक्रम में मौजूद स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने जनसंख्या दिवस के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि बढ़ती आबादी को चुनौती के बजाय एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का पूरा ध्यान मातृ एवं शिशु देखभाल पर केंद्रित है। सरकार युवाओं के कौशल विकास और शिक्षा के माध्यम से मानव संसाधन को मजबूत कर रही है। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि शिशु मृत्यु दर और कुपोषण को कम करने के लिए अभी और जमीनी काम करने की जरूरत है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी दो वर्षों में सब-सेंटर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों स्तर तक सी-सेक्शन ऑपरेशन की सुविधा पहुँचाने का लक्ष्य है, जिसके लिए हर जिला अस्पताल में 100 बेड का विशेष केंद्र बनाया जाएगा। साथ ही, उन्होंने मइयाँ सम्मान योजना के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताया।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बदलती जनसांख्यिकी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कार्यशाला में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत आबादी के मामले में वैश्विक स्तर पर पहले पायदान पर है, जिससे मौजूदा संसाधनों पर दबाव लाजिमी है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण का सीधा संबंध क्वालिटी ऑफ लाइफ से है। आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बीमारियों से होने वाली मौतों पर काबू पाने के कारण भी आबादी के स्वरूप में बदलाव आया है। उन्होंने जन-जागरूकता के माध्यम से आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास हासिल करने की बात कही।
पर्यावरण, संसाधन और बाल विवाह पर रोक

रांची सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार और राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. पुष्पा सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों ने भी कार्यशाला में अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने आगाह किया कि तेजी से बढ़ती आबादी के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण और भूमिगत जल स्तर पर गंभीर दबाव पैदा हो रहा है। इस संकट से निपटने के लिए कम उम्र में होने वाले विवाह पर प्रभावी नियंत्रण और परिवार नियोजन के आधुनिक उपायों को ग्रामीण स्तर तक ले जाना बेहद जरूरी है। कार्यशाला में खूंटी के सिविल सर्जन डॉ. ललित रंजन पाठक सहित राज्य भर के कई वरिष्ठ चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी और स्थानीय मुखिया उपस्थित थे।
