RINPAS Medicine Tender Controversy : मनोरोगियों की दवा खरीद में बड़ा फेरबदल, रिनपास ने बिना बिड खोले रद्द किया टेंडर, बदल दीं सख्त शर्तें

जन सभा विशेष रांची स्वास्थ्य
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द जन सभा | डेस्क

झारखंड में मनोरोगियों के इलाज के सबसे बड़े राज्यस्तरीय संस्थान रिनपास (RINPAS) में दवाओं की खरीद को लेकर एक बड़ा खेल शुरू हो गया है। यहाँ प्रति वर्ष होने वाली लगभग चार करोड़ रुपये की दवा खरीद से जुड़े पुराने टेंडर को अचानक रद्द कर दिया गया है। इसके बाद एक नया टेंडर जारी किया गया, जिसमें कई अहम शर्तों को या तो बहुत ढीला कर दिया गया है या पूरी तरह हटा ही दिया गया है। जानकार सूत्रों का दावा है कि किसी खास कंपनी को लाभ पहुँचाने के मकसद से टेंडर की शर्तों में यह भारी फेरबदल किया गया है।

बिना बिड खोले रद्द किया पहला टेंडर, CVC के नियमों की उड़ाईं धज्जियां

दस्तावेज़ों के अनुसार, रिनपास ने 19 मार्च 2026 को दवा आपूर्ति के लिए पहला टेंडर (DIR/44/03/2025-2026/Medicine) जारी किया था, जिसकी अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 तय की गई थी। सभी कंपनियों की निविदाएं प्राप्त होने के बावजूद 25 अप्रैल 2026 को बिना किसी बिड (Bid) को खोले ही टेंडर अचानक रद्द कर दिया गया। इसके लगभग तीन महीने बाद 22 जुलाई 2026 को नया टेंडर (DIR/07/07/2026-2027/Medicine) जारी किया गया। नियमानुसार यदि बिना बिड खोले टेंडर रद्द होता है, तो री-टेंडर में मूल शर्तें यथावत रखी जाती हैं। लेकिन रिनपास में फ्रेश टेंडर निकालकर शर्तों को पूरी तरह बदल दिया गया, जो केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की गाइडलाइंस के सीधे खिलाफ है।

पुराने और नए टेंडर की तुलना, जानिए कैसे बदल दी गईं प्रमुख शर्तें

वित्तीय राशि और अमानत राशि में कटौती

पहले जारी किए गए टेंडर की तुलना में नए नियमों के तहत आवेदन प्रक्रिया को बहुत ही सस्ता और आसान कर दिया गया है। टेंडर फीस, जो पहले 25 हजार रुपये निर्धारित की गई थी, उसे अचानक घटाकर मात्र 5 हजार रुपये कर दिया गया है। इसी तरह, अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट यानी बयाना राशि को भी 8 लाख रुपये से घटाकर सीधे 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है।

सप्लायर और मैन्युफैक्चरर के टर्नओवर में भारी ढील

कंपनियों की आर्थिक साख को परखने वाले टर्नओवर के मापदंडों में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। पुराने टेंडर में सप्लायर के लिए न्यूनतम 1 करोड़ रुपये का टर्नओवर होना अनिवार्य था, लेकिन नए टेंडर में इस शर्त को पूरी तरह हटा दिया गया है यानी अब शून्य टर्नओवर वाले सप्लायर भी इसमें हिस्सा ले सकते हैं। इसके अलावा, दवा निर्माता कंपनी के सालाना टर्नओवर की शर्त को भी 25 करोड़ रुपये से घटाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

कंपनी के अनुभव और जरूरी घोषणापत्रों का खात्मा

नए टेंडर में विश्वसनीयता और अनुभव से जुड़े कड़े प्रावधानों को दरकिनार कर दिया गया है। पुराने टेंडर में कंपनियों के पास दवा आपूर्ति का अनुभव होना और अनुभव प्रमाण पत्र जमा करना बाध्यकारी था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। साथ ही, दवा बनाने की प्रक्रिया से जुड़ा मैन्युफैक्चरर प्रोडक्शन डिक्लेरेशन, अधिकृत प्रतिनिधि साबित करने वाला ऑथोरिटी लेटर और कंपनी के कभी ब्लैकलिस्ट न होने का सेल्फ-डिक्लेरेशन देने की अनिवार्य शर्तों को नए टेंडर से पूरी तरह डिलीट कर दिया गया है।

सप्लाई में देरी पर पेनल्टी और प्लांट निरीक्षण की शर्त रद्द

दवाइयों की गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने वाले नियमों पर भी कैंची चलाई गई है। पुराने टेंडर के तहत अगर कोई कंपनी दवा सप्लाई करने में देरी करती थी, तो उस पर 0.25% से 0.5% तक का दंड शुल्क लगाने का नियम था, जिसे नए टेंडर में पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इतना ही नहीं, आवश्यकता पड़ने पर दवा बनाने वाली कंपनी के प्लांट का भौतिक निरीक्षण करने का जो प्रावधान पहले रखा गया था, उसे भी नए टेंडर से पूरी तरह हटा दिया गया है।

शर्तों में ढील से मरीजों की सेहत को बड़ा नुकसान, घटिया दवा का खतरा

टेंडर की शर्तों को आसान और खत्म करने का सीधा नुकसान मानसिक रूप से बीमार मरीजों और अस्पताल की व्यवस्था को भुगतना पड़ेगा। फीस और अर्नेस्ट मनी घटाने से साधारण और छुटभैया फर्में भी टेंडर में आ सकेंगी। सप्लायर टर्नओवर शून्य करने और अनुभव की बाध्यता खत्म करने से बिना तजुर्बे वाली कंपनियों को एंट्री मिलेगी, जिससे दवा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। सबसे खतरनाक बात यह है कि ब्लैकलिस्टिंग का शपथ पत्र न मांगने से काली सूची में दर्ज कंपनियाँ भी शामिल हो सकेंगी। वहीं ऑथोरिटी लेटर और प्लांट निरीक्षण की शर्त हटने से यह पता लगाना असंभव हो जाएगा कि दवा कौन, कहाँ और किस मानक पर बना रहा है।

मीडिया के सवालों से भागे जिम्मेदार, गोलमोल जवाब

टेंडर प्रक्रिया में जारी विवाद  की आशंका पर…जब मीडिया ने रिनपास की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने मीडिया का नाम सुनते ही मोबाइल फोन काट दिया। बाद में व्हाट्सएप पर जब उनसे टेंडर रद्द करने और शर्तों में ढील देने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने टेंडर प्रक्रिया देखने वाले मनोज जी से बात करने की सलाह दी। जब The Jan Sabha ने अधिकारी मनोज से उनके मोबाइल नंबर 7903552025 पर संपर्क किया, तो वे टेंडर रद्द होने और बदलावों पर कुछ भी बोलने से साफ मुकर गए। वे बार-बार केवल यही कहते रहे कि देखना पड़ेगा कि क्यों रद्द किया गया और दफ्तर आने की सलाह देते रहे। फोन पर कुछ भी बोलने से साफ इंकार कर दिए।

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