
द जन सभा | निरंजन भारती
हेमंत सोरेन सरकार पर किसानों के साथ वादाखिलाफी और विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को किसानों की ज्वलंत समस्याओं के समाधान और अपनी मांगों को लेकर कांके में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और बाद में राज्यपाल के नाम ज्ञापन कांके के प्रखंड विकास पदाधिकारी को सौंपा।

कृषि विरोधी नीतियों से त्रस्त हैं राज्य के किसान:
धरने में पहुंचे भाजपा नेताओं ने कहा कि कृषि को देश की रीढ़ और किसान को उसकी आत्मा माना जाता है। इसके बावजूद, झारखंड की वर्तमान हेमंत सरकार लगातार किसान विरोधी नीतियां अपना रही है। आज राज्य का अन्नदाता एक तरफ प्राकृतिक आपदाओं से परेशान और हताश है, तो दूसरी तरफ सरकार की गलत नीतियां उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रही हैं। इस सरकार की प्राथमिकता में गाँव, गरीब और किसान कहीं नहीं हैं, जिससे किसानों की समस्याएं दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही हैं।
महागठबंधन सरकार के चुनाव पूर्व वादे निकले खोखले:
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि झामुमो और कांग्रेस ने चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्रों में किसानों से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आते ही वे पूरी तरह खोखले साबित हुए। सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹3200 प्रति क्विंटल करने, वन उत्पादों के MSP में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने, कृषि के लिए मुफ्त बिजली देने और किफायती दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने का वादा किया था। इसके अलावा हर पंचायत में कृषि यंत्र बैंक और गोदाम निर्माण, ₹1 प्रति डिसमिल पर फसल बीमा और ₹1 प्रति पशुधन पर बीमा देने जैसे लोकलुभावन वादे किए गए थे, जिन्हें सरकार बनते ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सरकार की कृषि और सिंचाई व्यवस्था में कोई रुचि नहीं है।
धान खरीद में फिसड्डी साबित हुई सरकार, करोड़ों का भुगतान बकाया

भाजपा ने सरकार की धान खरीद नीति पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि ₹3200 प्रति क्विंटल का दावा करने वाली सरकार समय पर क्रय केंद्र (पैक्स) तक नहीं खोल पाती है। सरकार का 48 घंटे के भीतर भुगतान करने का दावा पूरी तरह विफल रहा है। धान बेचने के कई महीनों बाद भी आज राज्य के हजारों किसानों का करोड़ों रुपया बकाया है, जिससे वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। लेटलतीफी के कारण क्रय केंद्रों पर बिचौलियों का बोलबाला हो चुका है और सरकार हर बार समर्थन मूल्य पर धान खरीदने में नाकाम साबित हो रही है।
खाद और PDS के नमक की हो रही भारी कालाबाजारी:
नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार किसानों को प्राथमिकता देने का ढोंग रचती है, तो दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री के निर्वाचन जिले में खाद की भारी कालाबाजारी हो रही है। किसानों को खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ₹266 की सरकारी यूरिया की बोरी खुलेआम ₹800 तक में बेची जा रही है। हद तो यह है कि झारखंड में अब जन वितरण प्रणाली (PDS) के नमक तक की कालाबाजारी धड़ल्ले से की जा रही है, जिस पर प्रशासन मौन है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से टूटी किसानों की कमर:

हाल ही में राँची सहित राज्य के कई जिलों में हुई असमय बारिश और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण खेतों में लगी तरबूज, खीरा, ककड़ी और हरी सब्जियों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। कई किसानों ने कर्ज लेकर एकड़ भूमि में फसल लगाई थी, जो नष्ट हो चुकी है। इस भारी नुकसान से किसानों की आर्थिक कमर पूरी तरह टूट गई है और वे कर्ज के दलदल में फंसने को मजबूर हैं।
भ्रष्टाचार और बिचौलियावाद में डूबी है सरकार: जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह
धरना प्रदर्शन को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “हेमंत सरकार पूरी तरह से नीतिगत अपंगता और भ्रष्टाचार का शिकार हो चुकी है। जो सरकार अपने मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी नहीं रोक पा रही है, उससे पूरे राज्य के किसानों के कल्याण की उम्मीद करना बेईमानी है। ₹266 की यूरिया ₹800 में बिकना इस बात का सबूत है कि सरकार के संरक्षण में बिचौलिये फल-फूल रहे हैं। अगर सरकार ने तुरंत किसानों का बकाया भुगतान नहीं किया और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगाई, तो भाजपा पूरे जिले में चक्का जाम करेगी।
किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई: कमलेश राम
प्रदर्शन के दौरान अपने विचार रखते हुए भाजपा नेता कमलेश राम ने कहा, यह सरकार सिर्फ विज्ञापनों में किसानों की हितैषी बनती है, धरातल पर सच इसके ठीक उलट है। चुनाव जीतने के लिए इन्होंने ₹3200 का झुनझुना दिखाया, लेकिन आज किसान अपने ही बेचे गए धान के पैसे के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। बेमौसम ओलावृष्टि से सब्जी उत्पादक किसान तबाह हो चुके हैं, लेकिन सरकार एसी कमरों से बाहर नहीं निकल रही है। हम राज्यपाल महोदय से मांग करते हैं कि इस बहरी सरकार को जगाएं, अन्यथा हमारा यह आंदोलन पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा तक और उग्र रूप लेगा।”
मांगें पूरी न होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी:
भाजपा ने स्पष्ट किया कि आज का यह प्रदर्शन किसानों के प्रति राज्य सरकार की ढुलमुल नीति के खिलाफ एक सांकेतिक चेतावनी है। यदि सरकार ने इस ज्ञापन पर गंभीरता से विचार नहीं किया और किसानों को उनकी फसलों का उचित मुआवजा व हक नहीं दिया, तो भाजपा चुप नहीं बैठेगी। आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। इस धरना प्रदर्शन ने में शत्रुघ्न साहू, संदीप राम, कमलेश राम, मनोज महतो वाजपेयी, नरेंद्र कुमार, नसीब लाल महतो, गोपाल महतो, महानंद महतो, विकास मुंडा, सुकेश तिवारी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
राज्यपाल के मांग पत्र के मुख्य बिंदु
- धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तत्काल ₹3200 प्रति क्विंटल सुनिश्चित किया जाए।
- किसानों के धान की बकाया राशि का अविलंब और एकमुश्त भुगतान हो।
- बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जमीनी सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए।
- सब्सिडी पर समय से गुणवत्तापूर्ण खाद, बीज और कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
- पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की ‘मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना’ को दोबारा शुरू किया जाए।
- किसान ऋण माफी सीमा को ₹2 लाख करने की घोषणा की जटिलताओं को दूर कर वास्तविक समीक्षा की जाए।
- मानसून पर निर्भरता कम करने के लिए राज्य में समुचित सिंचाई की व्यवस्था हो।
- आधुनिक कृषि तकनीक के प्रति किसानों को जागरूक किया जाए और कोल्ड स्टोरेज का निर्माण हो।
- फसल और पशुधन बीमा योजना के मार्ग में आने वाले सभी अवरोधों को हटाया जाए।
- किसानों को कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली और आम जनता को ₹450 में गैस सिलेंडर दिया जाए।
