जनजातीय किशोरियों को सशक्त बनाने की पहल, झारखंड में “सशक्त” कार्यक्रम शुरू

रांची
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स्वास्थ्य, पोषण और नेतृत्व विकास पर रहेगा विशेष फोकस, पांच जिलों से हुई शुरुआत


रांची : झारखंड के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में किशोरियों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को राज्यस्तरीय कार्यक्रम “सशक्त” का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड, ‘एकजुट’ और ‘पिरामल स्वास्थ्य’ के संयुक्त तत्वावधान में रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।


कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने किया। इस मौके पर आरकेएसके के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ विजय किशोर रजक, एनयूएचएम के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ मुकेश मिश्रा समेत कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।


अपने संबोधन में शशि प्रकाश झा ने कहा कि किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर निवेश करना राज्य के बेहतर भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि अब केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुपोषण, कम उम्र में विवाह और खराब स्वास्थ्य चक्र को तोड़ने के लिए किशोरियों पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि लड़कियां जिम्मेदारी और अनुशासन के मामले में बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। ऐसे में उन्हें रोजगारोन्मुख शिक्षा, सही पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना समय की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि “सशक्त” कार्यक्रम के तहत काउंसलिंग, क्लिनिकल सेवाएं और सामुदायिक स्तर पर पीयर एजुकेटर मॉडल को गांव तक सक्रिय रूप से लागू किया जाएगा।
कार्यक्रम में चाईबासा के विभिन्न प्रखंडों से आए पीयर एजुकेटर्स ने भी अपने अनुभव साझा किए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि प्रत्येक माह की 24 तारीख को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में “उमंग” कार्यक्रम आयोजित कर किशोर-किशोरियों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता दी जा रही है।


चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है योजना


“सशक्त” कार्यक्रम को चार प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर तैयार किया गया है। इसके तहत तकनीकी सहायता इकाइयों को मजबूत करना, परिवारों और सहिया-एएनएम नेटवर्क को सक्रिय करना, किशोरियों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना तथा डिजिटल तकनीक के जरिए रियल टाइम निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।


तीन चरणों में होगा विस्तार

कार्यक्रम के पहले चरण में पाकुड़, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी और गुमला जिलों में इसे लागू किया जा रहा है। दूसरे चरण में इसे 9 आरकेएसके जिलों के 93 प्रखंडों तक विस्तारित किया जाएगा, जबकि तीसरे चरण में राज्य के शेष 15 जिलों में इसका विस्तार होगा।

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