द जन सभा निरंजन भारती
कांके अंचल के गागी पंचायत में 15वें वित्त आयोग से स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कार्य शुरू होते ही विवादों में घिर गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य का कड़ा विरोध किया और मुखिया फुलमनी तिर्की के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुखिया जानबूझकर इसी जमीन पर निर्माण करा रही हैं, जबकि क्षेत्र में भू-माफियाओं और अंचल प्रशासन की कथित मिलीभगत से लगभग पांच एकड़ गैर-मजूरवा जमीन बेच दिया गया है ।

विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कहा, हम मानते हैं कि यह गैर-मजूरवा जमीन है, और हम उप- स्वास्थ्य केंद्र का विरोध भी नहीं कर रहे हैं, लेकिन पिछले 100 से अधिक वर्षों से हमारा परिवार इसकी देखरेख कर रहा है और ठीक बगल में हमारा घर भी है। एक दिन पहले ही मुखिया की मौजूदगी में सहमति बनी थी कि 17 जुलाई को ग्राम सभा के बाद आगे का फैसला होगा, लेकिन मुखिया की शह पर संवेदक जीएस इंटरप्राइजेज ने ग्रामीणों को नजरअंदाज कर अगली ही सुबह से जबरन काम शुरू करवा दिया।
दूसरी ओर मौके पर विधि व्यवस्था संधारण अधिकारी चितरंजन टुडू ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा कि यह गैर-मजूरवा खास यानी पूरी तरह से सरकारी जमीन है। उन्होंने दलील दी कि आस-पास की घनी आबादी के स्वास्थ्य हितों को ध्यान में रखकर ही सरकार द्वारा इस जगह स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। अधिकारी ने विरोध कर रहे ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा को कि अगर किसी को इस निर्माण से आपत्ति है, तो वे सीधे वरीय अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखें, लेकिन सरकारी काम को रोका नहीं जा सकता।
इस बीच, विवाद तब और बढ़ गया जब प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने मुखिया फुलमनी तिर्की और उनके पति को बीच सड़क पर रोक लिया और निर्माण कार्य तुरंत बंद कराने की गुहार लगाने लगे। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए मुखिया ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और कहा कि यह मामला उनके बस के बाहर का है और वे इसी सिलसिले में अंचल अधिकारी से मिलने जा रही हैं।
मुखिया ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस जमीन का अधिग्रहण कब हुआ, कब मापी की गई और इस जगह का चयन कब व किस अधिकारी ने किया, इसकी उन्हें कोई आधिकारिक जानकारी ही नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को जरूर स्वीकारा कि मंगलवार को ग्रामीणों के साथ हुई बात चित में 17 जुलाई को ग्राम सभा आयोजित करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद उनकी जानकारी के बिना किसके आदेश पर संवेदक ने अगले ही दिन काम शुरू करवा दिया, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है।
