द जन सभा | निरंजन भारती
झारखंड के सरकारी विभागों में घोटालों की परंपरा इतनी समृद्ध हो चुकी है कि अफसर अब किसी नियम-कानून को भाव देना अपनी तौहीन समझते हैं। ताजा मामला रांची के सुप्रसिद्ध तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान का है, जहाँ पदों के क्रम को एक नया और क्रांतिकारी मोड़ दिया गया है। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में बड़े फैसलों और वित्तीय अधिकारों के लिए ऊंचे पदों की आवश्यकता होती है, लेकिन रिनपास के प्रबंधन ने इस रूढ़िवादी सोच को धता बता दिया है। यहाँ की प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलई ने चीफ अकाउंट्स ऑफिसर की मौजूदगी में, उनसे पद सोपान में काफी नीचे बैठे एक साधारण लेखा पदाधिकारी को वित्तीय अधिकार सौंप दिए हैं। अब संस्थान की तिजोरी की चाबी किसके हाथ में सुरक्षित है, यह तो भगवान ही जाने या फिर वे फाइलें जानें जो चोरी-छिपे सरकारी गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा रही हैं।

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प किरदार खुद प्रभारी निदेशक डॉ. जयति सिमलई का है। खबरों की मानें तो निदेशक पद के लिए जो न्यूनतम योग्यता यानी प्राध्यापक होना अनिवार्य है, उस कसौटी पर मैडम पूरी तरह खरी नहीं उतरती हैं। मगर कहते हैं न, सैयां भये कोतवाल तो अब डर काहे का! माननीय मंत्री जी के एक बेहद करीबी और रसूखदार रिश्तेदार का वरदहस्त प्राप्त होने के कारण, मैडम तमाम योग्यताओं को बौना साबित करते हुए इस मलाईदार पद पर विराजमान हैं। उनकी इस अवैध नियुक्ति और कार्यकाल में हुए चमत्कारी वित्तीय कारनामों के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो और झारखंड हाईकोर्ट में शिकायतें तो बहुत हुईं, लेकिन शासन-प्रशासन ने कान में ऐसा तेल डाल रखा है कि कोई आवाज अंदर तक पहुंच ही नहीं पाती।
रिनपास का यह प्रशासनिक हुनर सिर्फ नियुक्तियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि खरीदारी के मामले में भी यह संस्थान आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ बिना किसी क्रेय समिति की बैठक के ही करोड़ों की खरीदारी धड़ल्ले से की जा रही है। यही नहीं, सरकारी जेम पोर्टल से होने वाले टेंडरों को लेकर जो खुलासा हुआ है, वह तो ई-गवर्नेंस के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए आरोप है कि जेम पोर्टल के टेंडर संस्थान से नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारी के निजी आवास से अपलोड किए जा रहे थे। यानी सरकारी काम में वर्क फ्रॉम होम का ऐसा अनूठा उपयोग शायद ही पूरे देश में कहीं और देखने को मिले! इधर, मैनपावर और सिक्योरिटी सेवाओं में नौकरी के नाम पर कर्मियों से 30 से 50 हजार रुपये की सलामी वसूली जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस पूरे तमाशे को मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं, मानो वे भी इस जादुई व्यवस्था का लुत्फ उठा रहे हों।इस मामले पर संस्थान या संबंधित अधिकारी का पक्ष आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
