द जन सभा | निरंजन भारती
कांके अंचल में ऑनलाइन भूमि अभिलेखों में बड़े पैमाने पर हेरफेर का एक गंभीर मामला सामने आया है। कांके के अंचल अधिकारी अमित भगत ने इस सिलसिले में रांची के साइबर थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि सरकारी झारभूमि पोर्टल की ऑनलाइन पंजी-2 में कथित रूप से डिजिटल स्तर पर छेड़छाड़ कर अवैध जमाबंदी कायम की गई है। इस शिकायत के बाद राज्य के राजस्व महकमे और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

सुकुरहुटू और गारू मौजा की जमीन पर अवैध कब्जा
सीओ द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, यह पूरा फर्जीवाड़ा कांके अंचल के सुकुरहुटू और गारू मौजा की कीमती जमीनों से जुड़ा है। सुकुरहुटू मौजा के खाता संख्या 41 के तहत आने वाले विभिन्न प्लॉटों जैसे प्लॉट संख्या 70डी, 2511, 2475 आदि के रिकॉर्ड में ऑनलाइन बदलाव किए गए। वहीं, गारू मौजा के खाता संख्या 56 की करीब 1.28 एकड़ जमीन की भी ऑनलाइन पंजी-2 में अवैध रूप से जमाबंदी दर्ज करा दी गई। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह सब भू-माफियाओं और तकनीकी कर्मियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे दाखिल-खारिज का खेल
अंचल अधिकारी अमित भगत ने अपनी शिकायत में विशेष रूप से गारू मौजा से संबंधित म्यूटेशन वाद संख्या 10651 और 10652 (वर्ष 2025-26) का उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि इन मामलों में कथित तौर पर फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेजों के आधार पर जमीन का दाखिल-खारिज करा लिया गया। शुरुआती जांच में यह साफ संकेत मिले हैं कि भूमि के इस नामांतरण के लिए सरकारी रिकॉर्ड में डिजिटल स्तर पर अनधिकृत रूप से छेड़छाड़ की गई थी।
सॉफ्टवेयर डेवलपर और तकनीकी स्टाफ शक के दायरे में

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल झारभूमि पोर्टल की तकनीकी सुरक्षा और उसके प्रबंधन पर उठे हैं। सीओ ने अपनी प्राथमिकी में उन तमाम सॉफ्टवेयर डेवलपरों और कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका की जांच करने की मांग की है, जो पोर्टल की शुरुआत से लेकर अब तक इस सिस्टम से जुड़े रहे हैं। पुलिस को दी गई शिकायत में आशंका जताई गई है कि बिना किसी गहरी तकनीकी मिलीभगत या ‘बैकडोर एंट्री’ के ऑनलाइन पंजी-2 जैसे सुरक्षित सरकारी डेटा में इस तरह का बदलाव करना मुमकिन नहीं है।
म्यूटेशन की स्क्रूटनी के दौरान खुला पूरा राज
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब अंचल कार्यालय में जमीन के दाखिल-खारिज म्यूटेशन की नियमित प्रक्रिया चल रही थी। दस्तावेजों की बारीकी से जांच के दौरान जब ऑनलाइन उपलब्ध रिकॉर्ड्स का मिलान कार्यालय के वास्तविक और मूल कागजातों से किया गया, तो दोनों में बड़ा अंतर पाया गया। इसके बाद जब गहनता से जांच की गई, तो कई अन्य गंभीर अनियमितताएं और डिजिटल हेरफेर के सबूत मिले, जिसके बाद मामले को साइबर पुलिस के हवाले करने का फैसला लिया गया।
भू-माफियाओं का नेटवर्क और राज्यव्यापी रैकेट की आशंका
कांके के अंचल अधिकारी ने आरोप लगाया है कि कुछ संगठित भू-माफिया फर्जी कागजात तैयार कर सरकारी और निजी जमीनों को हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारी का मानना है कि यह डिजिटल घोटाला सिर्फ कांके अंचल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पूरे राज्य से जुड़े हो सकते हैं। यदि इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष तकनीकी जांच होती है, तो रांची के अन्य अंचलों के साथ-साथ झारखंड के कई जिलों में भी ऑनलाइन रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर अवैध जमाबंदी के बड़े मामलों का खुलासा हो सकता है।
