Hazaribagh Wife Murder Case: लुटेरों ने नहीं,सुहाग ने ही उजाड़ा सिंदूर’, हजारीबाग में मंजू देवी हत्याकांड का खौफनाक खुलासा । SP अमन कुमार की टीम ने 48 घंटे अपराधियों को भेजा सलाखों के पीछे

झारखंड
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The Jan Sabha संवाददाता/ हजारीबाग : झारखंड की हजारीबाग पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करते हुए यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से नहीं बच सकता। जिस पति ने लूटपाट का ड्रामा रचकर अपनी ही पत्नी की हत्या करवाई, पुलिस ने उसे और उसके साथियों को दबोच लिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीती 26 अप्रैल 2026 की रात करीब 9:15 बजे, हजारीबाग के केरेडारी थाना क्षेत्र में कोले रेलवे स्टेशन के पास एक दंपत्ति पर गोलीबारी हुई थी। इस हमले में मंजू देवी नाम की महिला की मौत हो गई, जबकि उसका पति विकास कुमार प्रजापति घायल हो गया था। शुरुआती तौर पर इसे अपराधियों द्वारा की गई लूटपाट की घटना माना जा रहा था, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली।

साजिश का खुलासा: पति ही निकला ‘विलेन’

पुलिस अधीक्षक अमन कुमार के निर्देश पर गठित SIT टीम ने जब गहराई से तकनीकी साक्ष्यों की जांच की, तो शक की सुई घायल पति विकास प्रजापति पर ही टिक गई। कड़ाई से पूछताछ करने पर विकास टूट गया और उसने सारा सच उगल दिया। उसने बताया कि पारिवारिक कलह से तंग आकर उसने अपनी पत्नी को रास्ते से हटाने के लिए अपने पिता और अन्य साथियों के साथ मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रची थी।

आरोपियों को फास्ट ट्रैक ट्रायल के जरिए कड़ी से कड़ी सजा मिले: पुलिस अधीक्षक

इस मामले पर पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, यह एक अत्यंत क्रूर और सोची-समझी साजिश थी, जहां एक पति ने ही रक्षक की जगह भक्षक की भूमिका निभाई। अपराधी ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए खुद को घायल करने तक का ड्रामा किया, लेकिन हमारी टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस झूठ को बेनकाब कर दिया। समाज में ऐसे जघन्य कृत्य करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। हम सुनिश्चित करेंगे कि गिरफ्तार आरोपियों को फास्ट ट्रैक ट्रायल के जरिए कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा हो।

लूटपाट का रचा गया था ‘खूनी ड्रामा’

योजना के मुताबिक, विकास अपनी पत्नी को मार्केटिंग के बहाने बाहर ले गया। लौटते वक्त पहले से घात लगाकर बैठे उसके साथियों ने मंजू देवी पर गोली चला दी। मामले को लूटपाट का रंग देने के लिए और पुलिस को गुमराह करने के लिए विकास ने खुद के हाथ में भी गोली मरवा ली थी, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

तीन गिरफ्तार, एक अब भी फरार

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी विकास प्रजापति (30 वर्ष), उसके पिता नरेश प्रजापति (56 वर्ष) और एक अन्य साथी लालेश्वर गंझू (22 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से घटना में इस्तेमाल की गई बिना नंबर वाली काले रंग की यामाहा मोटरसाइकिल और महिला का पर्स बरामद किया गया है। हालांकि, घटना में शामिल एक अन्य आरोपी सुनील गंझू अब भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।

पुलिस टीम की मुस्तैदी

इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में SIT टीम के नेतृत्वकर्ता अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पवन कुमा और केरेडारी थाना प्रभारी विवेक कुमार समेत पूरी टीम ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस का कहना है कि समाज में इस तरह के जघन्य अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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