विशेष संवाददाता रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने आज एक प्रेस वार्ता के जरिए भारतीय चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बेहद कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि बंगाल चुनाव के बहाने देश के लोकतांत्रिक ढांचे को ध्वस्त करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि जो खेल बंगाल में शुरू हुआ है, उसका असली मकसद झारखंड की अस्मिता और जनादेश को लूटना है, जिसे JMM किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।

प्रेस वार्ता में सुप्रियो भट्टाचार्य ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 1952 के बाद देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि इलेक्टोरल रोल को सस्पेंड कर फिर से चुनाव कराए जा रहे हैं। उन्होंने SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) को ‘महामृत्युंजय मंत्र’ बताते हुए कहा कि फॉर्म 6, 7 और 8 के सीधे नियमों को ताक पर रखकर साढ़े 12 लाख लोगों के नाम काट दिए गए हैं। अब भाजपा के इशारे पर 20 लाख और वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है, ताकि विपक्ष के जनाधार को कानूनी दांवपेच में फंसाकर वोट देने से रोका जा सके।
मकानों की गिनती और धर्म की पहचान: नया ‘सेंसस’ खेल
JMM ने गंभीर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब मकान नंबरों की पहचान कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सा वोटर कहाँ रहता है। भट्टाचार्य ने कहा, “मकान नंबर की गिनती का काम जनगणना (Census) का है, चुनाव आयोग का नहीं। यह जानबूझकर किया जा रहा है ताकि विरोधियों के घरों को चिह्नित किया जाए और नाम के आधार पर उनके धर्म और जाति की पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर फेंका जाए।” उन्होंने इसे ‘इंटेंशनल टारगेट’ करार दिया।
बंगाल बना ‘छावनी’, आम आदमी के हक पर पहरा
प्रेस वार्ता में बंगाल में अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती पर भी निशाना साधा गया। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जहाँ 3.5 लाख जवान लगते हैं, वहां अकेले बंगाल में 2.45 लाख पैरा-मिलिट्री फोर्स उतार दी गई है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बंगाल में चुनाव हो रहा है या युद्ध? दुर्गापुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 100 मीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को उनके घरों से निकालकर स्कूलों में शिफ्ट कर दिया गया। यह लोकतंत्र के नाम पर शुद्ध रूप से ‘फासीवाद’ है।
मोटरसाइकिल पर पाबंदी: गरीबों को रोकने का नया हथकंडा

JMM ने चुनाव आयोग के उस फरमान को ‘गरीब विरोधी’ बताया जिसमें मोटरसाइकिल पर अकेले चलने का आदेश दिया गया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा समर्थकों के पास चार पहिया वाहन हैं, लेकिन आम आदमी अपनी पत्नी, मां या बीमार पिता को बाइक पर बैठाकर वोट दिलाने नहीं ले जा सकता। यह पाबंदी केवल विपक्ष के वोट बैंक को डराने और मतदान केंद्र तक पहुँचने से रोकने के लिए लगाई गई है।
झारखंड में नहीं चलेगी ‘बिहार वाली चाल’
सुप्रियो भट्टाचार्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो चाल बिहार में चली गई थी, उसे झारखंड में दोहराने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा कि आधार, राशन कार्ड और आईडी कार्ड के नाम पर वोटरों को ‘लॉजिकल डिस्क्रीपेंसी’ में डालना और उन्हें 2034-35 तक न्यायधिकरणों के चक्कर लगवाना एक गहरी साजिश है। JMM ने स्पष्ट कर दिया है कि वे भाजपा और चुनाव आयोग की इस साठगांठ की हर चाल को समझते हैं और झारखंड की धरती पर इस ट्रेलर को सफल नहीं होने देंगे।
