झारखंड में ओबीसी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर जाति जनगणना, पंचायत चुनाव में प्रतिनिधित्व और विधानसभा परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा। अखिल भारतीय संपूर्ण क्रांति राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व सांसद डॉ. सूरज मंडल के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जारी जनगणना प्रक्रिया में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तरह स्पष्ट और अलग कॉलम का प्रावधान किया जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि ओबीसी समाज के भीतर अलग-अलग जातियों और उपजातियों की वास्तविक संख्या सामने आने के बाद ही उनकी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का सही आकलन किया जा सकेगा और उसी आधार पर सरकारी योजनाओं तथा सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां तैयार की जा सकेंगी। प्रतिनिधिमंडल में लोकहित अधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाथ साहू, झारखंड प्रदेश तैलिक साहू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश महतो, शिक्षाविद राज किशोर साहू, प्रमोद प्रसाद गुप्ता और सुबोध लकड़ा शामिल थे। डॉ. सूरज मंडल ने राज्यपाल के सामने ओबीसी की प्रत्येक उपजाति की स्पष्ट गणना की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि जनगणना के दौरान ओबीसी समुदाय की जातिवार संख्या दर्ज नहीं की जाती है तो भविष्य में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक योजनाएं तैयार करने के लिए जरूरी सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। प्रतिनिधिमंडल की ओर से कहा गया कि ओबीसी समुदाय को एक व्यापक श्रेणी में रखने के बजाय उसके भीतर आने वाली विभिन्न जातियों की संख्या और सामाजिक स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा सामने आना चाहिए। उनका तर्क है कि जातिगत आंकड़ों के आधार पर सरकार यह समझ सकेगी कि किन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक सहायता की जरूरत है और उनके लिए किस तरह की नीतियां बनाई जानी चाहिए।
लोकहित अधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाथ साहू ने कहा कि केवल जाति जनगणना कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसमें ओबीसी समाज के भीतर विभिन्न जातियों की संख्या भी स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आबादी का वास्तविक आंकड़ा सामने आने के बाद ही उसके अनुरूप नीतियां और योजनाएं बनाने तथा उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में ठोस काम किया जा सकता है। इसी क्रम में उन्होंने झारखंड में परिसीमन का मुद्दा भी उठाया और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग रखी। उनके मुताबिक, परिसीमन के बाद विभिन्न सामाजिक समूहों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने आगामी पंचायत चुनाव में भी ओबीसी आरक्षण के साथ आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग राज्यपाल के सामने रखी। झारखंड प्रदेश तैलिक साहू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश महतो ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में ओबीसी समुदाय को एक व्यापक श्रेणी में रखने के कारण अलग-अलग जातियों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति सामने नहीं आ पाती। उनका कहना था कि जब तक प्रत्येक जाति की संख्या और उसकी सामाजिक स्थिति से संबंधित स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक यह तय करना मुश्किल रहेगा कि सरकारी योजनाओं और सामाजिक-आर्थिक नीतियों का लाभ किन समुदायों तक किस स्तर पर पहुंच रहा है। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि जनगणना प्रक्रिया में ओबीसी के लिए ऐसा प्रावधान किया जाए, जिससे अलग-अलग जातियों की संख्या का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार हो सके। वहीं शिक्षाविद राज किशोर साहू ने कहा कि ओबीसी समुदाय के भीतर जातिवार आंकड़े सामने आने के बाद ही सामाजिक न्याय की नीतियों को अधिक स्पष्ट आधार मिल सकेगा और विभिन्न जातियों को उनकी वास्तविक सामाजिक स्थिति के अनुसार आगे बढ़ाने के लिए नीति बनाई जा सकेगी।
