द जन सभा डेस्क | कांके
कांके थाना क्षेत्र के अरसंडे स्थित याशी हॉस्पिटल में सोमवार को एक माह की बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशिभूषण प्रसाद के साथ मारपीट की गई और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। बीच-बचाव करने आए अस्पताल के कर्मचारियों के साथ भी धक्का मुक्की और मारपीट की गई। गुस्साए लोगों ने अस्पताल के रिसेप्शन, ओपीडी और डॉक्टर के कमरे के दरवाजे तोड़ दिए। अस्पताल में खड़ी एक कार को भी क्षतिग्रस्त कर दिया । यह घटना सोमवार दोपहर करीब पौने तीन बजे की बताई जा रही है। डॉ. शशिभूषण प्रसाद ने इस मामले में कांके थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत दी है। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि पिठोरिया के कोनकी निवासी आफताब आलम अपनी एक माह की बेटी का याशी हॉस्पिटल में ओपीडी के माध्यम से इलाज करा रहे थे। बच्ची को ब्लड इंफेक्शन था। डॉक्टर ने उसे इंजेक्शन लगाने की सलाह दी थी। डॉक्टर के अनुसार, परिजन अस्पताल के बजाय बाहर से इंजेक्शन लगवा रहे थे। सोमवार को भी बच्ची को सुबह करीब पौने 12 बजे अस्पताल लाया गया था। ओपीडी में इलाज के बाद परिजन उसे घर ले गए थे।

डॉक्टर की शिकायत के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब तीन बजे परिजन बच्ची को दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के दौरान बच्ची को मृत पाया गया। इसके बाद परिजन और उनके साथ आए अन्य लोग भड़क गए। जिसके बाद उन्होंने डॉक्टर के कमरे में घुसकर उनके साथ मारपीट की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। घटना की सूचना मिलने पर कांके पुलिस अस्पताल पहुंची और स्थिति को संभाला। वहीं, बच्ची के पिता आफताब अंसारी ने डॉक्टर के आरोपों से अलग अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि उनकी बेटी का इलाज 21 सितंबर से याशी हॉस्पिटल में चल रहा था। इस दौरान डॉक्टर ने बच्ची को कुल 16 इंजेक्शन लगाने की सलाह दी थी। पिता के अनुसार, इनमें से 14 इंजेक्शन अस्पताल की नर्स ने अस्पताल में ही लगाए थे, जबकि केवल दो इंजेक्शन बाहर से लगवाए गए थे।
बच्ची के पिता ने बताया कि सोमवार को जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब हुई, तो वे उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। उनके मुताबिक, डॉक्टर ने बच्ची की हालत देखकर बताया कि उसका शरीर ठंडा पड़ रहा है। इसके बाद अस्पताल में बच्ची को गर्म सेंक दिया गया और उसे वापस घर भेज दिया गया। पिता का कहना है कि घर लौटने के बाद बच्ची की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर डॉक्टर को बच्ची की बीमारी और उसके इलाज में परेशानी हो रही थी, तो उसे किसी दूसरे अस्पताल में रेफर कर देना चाहिए था। इधर, एचबीआई आईएमए झारखंड के सचिव और एएचपीआई झारखंड के सचिव डॉ. शंभू प्रसाद सिंह ने डॉक्टर के साथ हुई मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों पर हमला करना तथा अस्पताल में तोड़फोड़ करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने आईकेडी हॉस्पिटल में हुई मारपीट और तोड़फोड़ की घटना की भी निंदा की। डॉ. शंभू प्रसाद सिंह ने राज्य सरकार से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में इस तरह की घटनाओं को रोकने और चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था की जानी चाहिए।
