रांची में विश्व तेली दिवस पर दिखी समाज की एकजुटता, परिसीमन और राजनीतिक भागीदारी पर मंथन

रांची
Share Now

द जन सभा, डेस्क | रांची

गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार को रांची में विश्व तेली दिवस धूमधाम से मनाया गया। तेली समाज झारखंड की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकजुटता, समाज के उत्थान, शिक्षा, राजनीतिक भागीदारी और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में समाज के लोगों ने एकजुट होकर आगे बढ़ने और आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करने का संदेश दिया।

बापू वाटिका से निकला पैदल मार्च, गूंजे एकता के नारे

विश्व तेली दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से हुई। समाज के लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके बाद सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल मार्च करते हुए प्रेस क्लब सभागार पहुंचे। पैदल मार्च के दौरान ‘तेली एकता जिंदाबाद’ समेत कई नारे लगाए गए। मार्च में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और समाज के अन्य लोग शामिल हुए। इस दौरान समाज की एकजुटता और सामूहिक भागीदारी साफ तौर पर देखने को मिली।

मां कर्मा और भामाशाह को किया नमन

प्रेस क्लब पहुंचने के बाद कार्यक्रम की शुरुआत समाज की आराध्य मां कर्मा माता और दानवीर भामाशाह समेत अन्य महापुरुषों को नमन कर की गई। उनकी प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि अजय शाह और आयोजन समिति के सदस्यों हरिनाथ साहू, महेश महतो, राजकिशोर साहू, शत्रुघ्न साहू, संजय साहू और रौशन साहू ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का संचालन शत्रुघ्न साहू और संजय साहू ने संयुक्त रूप से किया।

समाज की ताकत एकजुटता में : वक्ता

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता होती है। समाज के लोगों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के लिए मिलकर काम करना होगा। वक्ताओं ने कहा कि समाज का विकास तभी संभव है, जब हर वर्ग और हर पीढ़ी की इसमें भागीदारी हो। खासकर युवाओं को सामाजिक गतिविधियों में आगे आने और नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर

कार्यक्रम में समाज की राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात मजबूती से रखने के लिए राजनीतिक रूप से जागरूक और सक्रिय होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज की भागीदारी राजनीति के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र में भी बढ़नी चाहिए। इसके लिए समाज के लोगों को संगठित होकर काम करने की जरूरत है।

परिसीमन के मुद्दे पर भी हुई चर्चा

कार्यक्रम में परिसीमन के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने परिसीमन का समर्थन करते हुए कहा कि समाज से जुड़े मुद्दों और हितों को मजबूती से सामने रखने के लिए जागरूकता और एकजुटता जरूरी है। वक्ताओं का कहना था कि समाज को बदलते समय के साथ अपनी भूमिका को मजबूत करना होगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।

अजय शाह ने कहा- एकता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अजय शाह ने अपने संबोधन में कहा कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है। समाज के लोगों को आपसी सहयोग और भाईचारे के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने पर जोर दिया।

हरिनाथ साहू बोले- एक मंच पर आना जरूरी

हरिनाथ साहू ने कहा कि समाज के विकास के लिए सभी लोगों को एक मंच पर आना होगा। उन्होंने कहा कि जब समाज की एकता मजबूत होगी, तभी समाज अपनी समस्याओं और अधिकारों की बात प्रभावी ढंग से रख सकेगा। उन्होंने युवाओं से समाज के सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और नेतृत्व की भूमिका निभाने की अपील की।

महेश महतो ने शिक्षा और जागरूकता पर दिया जोर

महेश महतो ने कहा कि समाज की तरक्की के लिए शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर सामाजिक माहौल तैयार करने और युवाओं को शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ने पर जोर दिया।

पारंपरिक पहचान से आधुनिक दौर तक का सफर

तेली समाज का इतिहास भारत के पारंपरिक व्यवसाय और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा रहा है। ‘तेली’ नाम को पारंपरिक रूप से तेल निकालने और तेल के कारोबार से जोड़ा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इस समुदाय की सामाजिक पहचान और परंपराओं में अंतर जरूर रहा है, लेकिन तेल उत्पादन और इससे जुड़े कारोबार ने लंबे समय तक समाज की आर्थिक पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुराने समय में तेलघानी के जरिए तेल निकाला जाता था। घरों में इस्तेमाल के अलावा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भी तेल की जरूरत होती थी।

तेल और तेल के बीजों के कारोबार से जुड़े होने के कारण कई क्षेत्रों में तेली समुदाय स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। समय के साथ समाज के पारंपरिक पेशे में बदलाव आया। तेल निकालने के काम के अलावा समाज के लोग खेती, व्यापार, नौकरी, शिक्षा और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़े। आज तेली समाज के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान में मां कर्मा का विशेष स्थान है। मां कर्मा को समाज की आराध्य के रूप में माना जाता है। उनके जीवन और विचारों को भक्ति, सेवा और सामाजिक एकता से जोड़कर देखा जाता है।

महिलाओं और युवाओं की भी रही भागीदारी

विश्व तेली दिवस के कार्यक्रम में महिलाओं और युवाओं की भी अच्छी भागीदारी रही। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने समाज की एकता को मजबूत करने और सामाजिक हित के मुद्दों पर मिलकर काम करने की बात कही। कार्यक्रम में शामिल लोगों का कहना था कि समाज के विकास के लिए केवल बड़े आयोजनों तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सहयोग और युवाओं के मार्गदर्शन के क्षेत्र में लगातार काम करने की जरूरत है।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर महेश महतो, अजय शाह, हरिनाथ साहू, डॉ. रौशन कुमार साहू, मदन साहू, राजकिशोर साहू, शत्रुघ्न साहू, संजय साहू, ललित साही, संजय कुमार, निरंजन भारती, रामदयाल साहू, सतीश साहू, कपिल साहू, लक्ष्मण साहू, रामविलास साव, कुंज बिहारी साव, अशोक साव, विजय साहू, रेणु देवी, आशा रानी, मीरा देवी, बलदेव साहू, प्रमोद प्रसाद गुप्ता, विशाल साहू, अरविंद कुमार, राहुल क्रांति, बेनी साहू, शंकर प्रसाद, ललित नारायण साहू, विनोद साहू, राजू साहू, धनेश्वर साहू, दानेश्वर साहू, सुरेंद्र साहू, गणेश साहू, दीपक साहू, बाबूलाल साहू, बिंदेश्वर साहू और कुमार साहू समेत बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *