आदिवासी युवक से CCL में नौकरी दिलाने के नाम पर 5.80 लाख की ठगी,आरोपी गिरफ्तार, गया जेल

रांची
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फर्जी जॉइनिंग लेटर और ई-मेल के जरिए भरोसा जीतता था आरोपी, झारखंड से बिहार तक फैला है नेटवर्क, जांच में जुटी पुलिस

द जन सभा, डेस्क | रांची

सीसीएल में नौकरी दिलाने के नाम पर आदिवासी युवक से 5 लाख 80 हजार रुपये की कथित ठगी के मामले में कांके पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी अभियुक्त ऋषिकांत रोशन को गिरफ्तार कर सोमवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मामले में मुख्य अभियुक्त बताए जा रहे गौतम कुमार को भी पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है। कांके थाना में दर्ज कांड संख्या 181/2026, दिनांक 13 सितंबर 2026 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4)/316(2)/336(3)/338/340(2)/3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार ऋषिकांत रोशन (लगभग 37 वर्ष), पिता ब्रह्मदेव महतो, निवासी ग्राम दारुडीह, पोस्ट संगवार, थाना लेस्लीगंज, जिला पलामू पर कांड के वादी संजय मुंडा को सीसीएल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 5.80 लाख रुपये लेने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए सीसीएल के लेटर हेड पर कथित फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार कर डाक के माध्यम से संजय मुंडा के पास भेजा गया था। इससे पहले नौकरी की तलाश कर रहे संजय को क्लर्क पद पर नौकरी दिलाने की गारंटी दी गई थी। मूल रूप से इटकी निवासी संजय मुंडा कई वर्षों से कांके डैम साइड स्थित अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। नौकरी की तलाश के दौरान वह आरोपियों के संपर्क में आया और नौकरी पक्की होने के भरोसे में रकम दे दी। बाद में जब उसे पूरे मामले पर संदेह हुआ तो उसने कांके थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि युवाओं का भरोसा जीतने के लिए सीसीएल और एनटीपीसी जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम से फर्जी ई-मेल आईडी का इस्तेमाल किया जाता था। कथित तौर पर इन्हीं ई-मेल के माध्यम से नौकरी, दस्तावेज और नियुक्ति से संबंधित जानकारी भेजी जाती थी, ताकि पूरा मामला कंपनी की आधिकारिक प्रक्रिया जैसा दिखाई दे। आरोपियों ने रकम लेने के लिए ऑनलाइन भुगतान का भी इस्तेमाल किया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संजय मुंडा से ली गई 5.80 लाख रुपये की रकम किन बैंक खातों या डिजिटल माध्यमों के जरिए ली गई और बाद में उसे किन-किन खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, ऑनलाइन पेमेंट रिकॉर्ड, ई-मेल आईडी, कॉल डिटेल और उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी खंगाल रही है। जांच में गौतम कुमार का नाम मुख्य अभियुक्त के तौर पर सामने आया है, जिसे नामकुम थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब दोनों आरोपियों की भूमिका, उनके आपसी संबंध और इस कथित ठगी में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि मामला केवल एक युवक से ठगी तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। झारखंड के अलावा बिहार और दूसरे राज्यों में भी आरोपियों के संपर्क और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि आरोपियों ने अब तक कितने युवाओं को नौकरी के नाम पर अपना शिकार बनाया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

कांके थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर कुणाल कुमार ने बताया कि संजय मुंडा के लिखित आवेदन के आधार पर मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की है और कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है तथा ठगी में शामिल अन्य लोगों, पैसों के लेन-देन, फर्जी नियुक्ति पत्र, ई-मेल आईडी और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और प्रारंभिक जांच के तथ्यों की विस्तृत पड़ताल अभी जारी है तथा जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि सीसीएल और एनटीपीसी जैसी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर कथित गिरोह कितने समय से सक्रिय था और इसके तार झारखंड के अलावा बिहार व अन्य राज्यों में किन लोगों से जुड़े हैं। इस मामले ने एक बार फिर नौकरी के नाम पर होने वाली साइबर और फर्जीवाड़ा आधारित ठगी को लेकर युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत सामने ला दी है। सीसीएल में भर्ती के लिए कंपनी की ओर से आधिकारिक विज्ञापन और निर्धारित चयन प्रक्रिया होती है। ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा नौकरी पक्की कराने, क्लर्क पद दिलाने या नियुक्ति के नाम पर पैसे की मांग किए जाने पर उम्मीदवारों को सावधान रहना चाहिए। किसी भी नियुक्ति पत्र, ई-मेल या लेटर हेड को केवल उसके स्वरूप के आधार पर वास्तविक नहीं मानना चाहिए और भर्ती से जुड़ी जानकारी का सत्यापन कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट तथा संबंधित भर्ती अधिसूचना से करना चाहिए।

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