
The Jan Sabha संवाददाता रांची: सिस्टम की तानाशाही और युवा वकीलों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ आज झारखंड हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट परिसर में आक्रोश की लहर देखने को मिली। यंग लॉयर्स एसोसिएशन के आह्वान पर राजधानी के सैकड़ों युवा अधिवक्ताओं ने अपनी भुजाओं पर ‘रेड रिबन’ बांधकर यह साफ कर दिया कि अब वे किसी भी प्रकार के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में एक युवा वकील के साथ हुई अभद्रता और पुलिस कस्टडी की धमकी ने पूरे विधि जगत को हिला कर रख दिया है, जिसके विरोध में आज रांची के वकीलों ने न्याय के मंदिर में अपनी एकजुटता का शंखनाद किया।
सुबह से ही हाईकोर्ट और सिविल कोर्ट परिसर में नजारा बदला हुआ था। अधिवक्ता केवल काला कोट ही नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में लाल रिबन पहनकर पैरवी करते नजर आए। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल एक घटना के खिलाफ नहीं है, बल्कि युवा वकीलों के सम्मान, गरिमा और सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग को लेकर एक बड़ी लड़ाई का आगाज है। पूरे दिन न्यायिक कार्यों में शामिल होने के बाद शाम को हाईकोर्ट परिसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसोसिएशन ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि वकीलों के साथ किया गया दुर्व्यवहार न्याय प्रणाली की जड़ों पर प्रहार है।
प्रेस को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के महासचिव वेंकटेश कुमार ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि युवा वकील कानून की पेचीदगियों को सीखने के लिए रात-दिन संघर्ष करते हैं। उन्होंने बेंच और बार के रिश्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी युवा साथी से मानवीय भूल या अनुभव की कमी के कारण कोई त्रुटि होती है, तो उसे सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए। ‘कोर्ट रूम में पुलिस कस्टडी की धमकी देना’ न केवल अलोकतांत्रिक है, बल्कि नए वकीलों के मनोबल को कुचलने की साजिश है। उन्होंने दो टूक कहा कि संवेदनशीलता और सम्मान के बिना न्याय व्यवस्था की मजबूती खोखली है।
संगठन ने मांग की है कि न्यायाधीशों को युवा अधिवक्ताओं के प्रति अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाना होगा। बेंच पर बैठे लोग संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं, इसका अर्थ यह कतई नहीं कि वे किसी अधिवक्ता को अपमानित करें। अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर स्वर बुलंद किया कि रेड रिबन केवल विरोध नहीं, बल्कि हमारी अखंड एकजुटता और संवेदनशीलता का आईना है। हम पूरी ऊर्जा के साथ न्याय के मार्ग पर बढ़ेंगे, लेकिन अपने आत्मसम्मान की बलि देकर नहीं।
प्रेस वार्ता में यंग लॉयर्स एसोसिएशन के फाउंडर वाजिद अली, अध्यक्ष फहीम अख्तर, महासचिव वेंकटेश कुमार, उपाध्यक्ष अभिषेक राज भार्गव, सचिव प्रशासन दिवाकर सिप्पी और शैयाकुर रहमान समेत सैकड़ों अधिवक्ता शामिल हुए। अधिवक्ताओं की इस लामबंदी ने प्रशासन और संबंधित संस्थाओं को यह संदेश दे दिया है कि यदि युवा वकीलों के हितों और उनके सम्मान पर आंच आई, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
