
The Jan Sabha संवाददाता, धनबाद : कोयला राजधानी धनबाद में पानी की एक-एक बूंद के लिए मचे हाहाकार ने अब सियासी जंग का रूप ले लिया है। पेयजल संकट से त्रस्त जनता के सब्र का बांध सोमवार को उस वक्त टूट गया, जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिला समाहरणालय का घेराव किया। ‘मटका फोड़’ प्रदर्शन के जरिए भाजपा ने हेमंत सरकार की घेराबंदी की और सीधे तौर पर जिला प्रशासन को चेताया कि अगर प्यास नहीं बुझी, तो यह आक्रोश सरकार को ले डूबेगा।
प्रदर्शन के मुख्य चेहरा और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, यह विडंबना ही है कि दामोदर और बराकर जैसी विशाल नदियों की गोद में बसा धनबाद आज डोभा और नालों का गंदा पानी पीने को मजबूर है। भाजपा की सरकार ने मैथन डैम से पानी लाने का ऐतिहासिक काम किया था, लेकिन वर्तमान सरकार की ‘कुंभकर्णी नींद’ ने पाइपलाइनों को सूखा दिया है।
मरांडी यहीं नहीं रुके, उन्होंने केंद्र बनाम राज्य की जंग को हवा देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन झारखंड की जेएमएम-कांग्रेस सरकार इस पवित्र योजना को भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र से आने वाला पैसा जनता के गले तक पानी पहुंचाने के बजाय बिचौलियों की जेब में जा रहा है।
इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन भी साफ नजर आया। सांसद ढुल्लू महतो, पूर्व सांसद पीएन सिंह, विधायक राज सिन्हा, रागिनी सिंह और शत्रुघ्न महतो जैसे दिग्गजों ने एक सुर में सरकार को कोसा। कार्यकर्ताओं के भारी हुजूम और मटका फोड़ने के शोर से घंटों समाहरणालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। महानगर अध्यक्ष श्रवण राय और ग्रामीण अध्यक्ष मोहन कुंभकार के नेतृत्व में जुटे कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया कि यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है।
भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति सुचारू नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। फिलहाल, इस प्रदर्शन ने जिले की बदहाल पेयजल व्यवस्था और सरकार की कार्यशैली पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
