द जन सभा | डेस्क
हजारीबाग जिले में चंद्रगुप्त कोल परियोजना से प्रभावित और विस्थापित ग्रामीणों का आक्रोश अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है। केरेडारी क्षेत्र के स्थानीय भू-रैयतों और बेरोजगार युवाओं ने कोल कंपनी सुशी इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और स्थानीय कथित दलालों के गठजोड़ के तहत स्थानीय भू- रैयतों को दरकिनार कर खनन कार्य किया जा रहा है ।ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने शुरुआत में माइंस विस्तार होने पर करीब 5000 स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का भरोसा दिया था, लेकिन आज कोयला ढुलाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है किन्तु अब तक 50 स्थानीय लोगों को भी काम नहीं मिला है। इसके विपरीत, बाहरी राज्यों से आए 500 से अधिक लोगों को नौकरी पर रख लिया गया है, जिसके खिलाफ स्थानीय युवा अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को भेजे शिकायती पत्र में न केवल रोजगार में धांधली, बल्कि पर्यावरणीय नुकसान और स्थानीय स्तर पर फर्जी कमेटियों के जरिए डराने-धमकाने के भी संगीन आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, नियमों को ताक पर रखकर बेगनतरी नदी पर अवैध बांध बनाया गया है, जिससे किसानों की फसलें और जमीनें डूब रही हैं। इसके अलावा, प्रशासन के दखल के बावजूद भू-रैयत सलाहकार समिति के नाम पर कुछ रसूखदार लोग अपने करीबियों को फायदा पहुंचा रहे हैं और आवाज उठाने वाले युवाओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द संज्ञान लेकर नई निष्पक्ष कमेटी का गठन और रोजगार की व्यवस्था नहीं की गई, तो 500 से 800 की आबादी में ग्रामीण रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।
