कांके प्रखंड में बालू का काला खेल!

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द जन सभा डेस्क | रांची

NGT की रोक के बावजूद कैसे किया जा रहा है बालू भंडारण ? रात के अंधेरे में कौन दे रहा है संरक्षण ?

कांके प्रखंड में बालू का खेल किसके संरक्षण में चल रहा है ? NGT की रोक के बावजूद कांके प्रखंड क्षेत्र में जगह-जगह बालू का स्टॉक और रात के अंधेरे में हाईवा से धड़ल्ले से ढुलाई की जा रही है, ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह पूरा कारोबार किसकी निगरानी में संचालित हो रहा है? कौन है वह ताकत जिसके भरोसे बालू कारोबारी बेखौफ होकर रात के अंधेरे में वाहन दौड़ा रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है? यदि बालू का भंडारण और परिवहन पूरी तरह वैध है, तो फिर रात के अंधेरे में इतनी गोपनीयता क्यों? कांके प्रखंड में कथित अवैध बालू भंडारण का मामला अब महज एक-दो स्थानों तक सीमित नहीं बताया जा रहा, बल्कि दर्जनों जगहों पर बालू के बड़े-बड़े स्टॉक लगाए जाने की चर्चा है। जब द जनसभा संवाददाता ने मामले को लेकर माइनिंग इंस्पेक्टर से सवाल किया तो उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में रेंडो-पतरातू में मात्र एक बालू भंडारण का लाइसेंस है और अन्य स्थानों की जानकारी उनके पास नहीं है। कार्रवाई नहीं होने के सवाल पर उनका कहना था कि जानकारी मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन यहीं से प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़ा होता है जब विभाग को ही कथित रूप से दर्जनों स्टॉक की जानकारी नहीं है, तो आखिर ये स्टॉक किसकी नजर के सामने और किस भरोसे पर चल रहे हैं? कांके प्रखंड में कांके, पिठौरिया और एनएलयू थाना क्षेत्र आते हैं। इसके बावजूद यदि अलग-अलग इलाकों में बालू का कथित भंडारण और रात में परिवहन जारी है, तो पुलिस और खनन विभाग की संयुक्त निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी बीच अपुष्ट सूत्रों के हवाले से एक और गंभीर दावा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, बालू कारोबार में कथित तौर पर एक ‘एंट्री सिस्टम’ संचालित होने की चर्चा है, जिसमें कारोबारियों से गाड़ियों की संख्या, वाहन नंबर और आवाजाही से जुड़ी जानकारी लिए जाने का दावा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, सूत्रों के दावे के मुताबिक प्रति हाइवा कमीशन की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से एंट्री सिस्टम या कमीशन की पुष्टि नहीं की गई है।

यदि ये दावे सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अवैध बालू भंडारण या परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके पीछे चल रहे कथित संगठित नेटवर्क की जांच का विषय भी बन सकता है। आखिर कौन कर रहा है वाहनों की कथित एंट्री? किसके इशारे पर रात में वाहन निकल रहे हैं? किस स्तर पर हो रही है कथित वसूली? और यदि विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, तो इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इस पूरे खेल की भनक जिम्मेदार तंत्र तक क्यों नहीं पहुंच रही? कांके में बालू के कथित काले कारोबार ने अब कई सवालों को जन्म दे दिया है! जिस तरफ कानून को ताक पर रखकर खुलेआम अवैध बालू का कारोबार किया जा रहा है क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है?

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