द जन सभा | डेस्क
झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। JSSC CGL से लेकर JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा तक में गड़बड़ी के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की गई है। पत्र में सीधा सवाल उठाया गया है कि जब छात्र लंबे समय से परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत कर रहे थे और सबूत भी दे रहे थे, तो सरकार ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? अगर आखिर में परीक्षा रद्द ही करनी थी, तो छात्रों के आंदोलन और सड़क पर उतरने का इंतजार क्यों किया गया?

पत्र में JSSC CGL की CID जांच पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि जांच जिस तरह से हुई, उससे असली गड़बड़ी और उसके पीछे के लोगों तक पहुंचने के बजाय मामला सीमित दायरे में रह गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पत्र में CID के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खास तौर पर अनुराग गुप्ता को लेकर अभ्यर्थियों से कथित वसूली और संरक्षण देने जैसे आरोपों का जिक्र किया गया है। मांग की गई है कि इन आरोपों की जांच भी किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर भी पत्र में कई सवाल उठाए गए हैं। इसमें इंटरव्यू बोर्ड को कथित तौर पर सेट करने, अभ्यर्थियों से पैसे लेने और कोडिंग-डिकोडिंग के जरिए कुछ खास अभ्यर्थियों को विशेष बोर्ड में भेजने जैसे आरोपों का जिक्र है।

पत्र में कहा गया है कि अगर इंटरव्यू में सचमुच किसी तरह की सेटिंग हुई है, तो सिर्फ कुछ लोगों से पूछताछ करके मामला खत्म नहीं होना चाहिए। इंटरव्यू बोर्ड में कौन-कौन था, किस अभ्यर्थी को किस बोर्ड में भेजा गया, अंक कैसे दिए गए और पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका थी इन सबकी जांच होनी चाहिए। इसी को लेकर पत्र में एक और बड़ा सवाल उठाया गया है। जब इंटरव्यू बोर्ड में शामिल कुछ अधिकारियों की भूमिका पर ही सवाल उठ रहे हैं, तो उसी विभाग या एजेंसी से जांच कैसे निष्पक्ष मानी जाएगी? इसलिए मामले की जांच CBI या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। पत्र में इंटरव्यू बोर्ड से जुड़े दस्तावेज, अभ्यर्थियों का आवंटन, कोडिंग-डिकोडिंग का रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा, कॉल डिटेल और पैसों के लेन-देन से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।

सिर्फ JSSC CGL और JPSC ही नहीं, रद्द की गई दूसरी परीक्षाओं को लेकर भी सरकार से सवाल किया गया है। पत्र में कहा गया है कि कई रद्द परीक्षाओं की जांच CID को दी गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पहले की जांच को लेकर ही सवाल हैं, तो फिर नई परीक्षाओं की जांच भी उसी एजेंसी को क्यों सौंपी गई? पत्र में साफ कहा गया है कि छात्रों की मांग किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर है। लाखों छात्र सालों मेहनत करते हैं, परीक्षा देते हैं और फिर अगर पेपर लीक, सेटिंग या किसी दूसरी गड़बड़ी के कारण परीक्षा रद्द हो जाए, तो उनकी मेहनत और उम्र दोनों पर असर पड़ता है।

अब मांग यही है कि JSSC CGL, JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा और दूसरी विवादित परीक्षाओं की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल हैं, उन्हें जांच से अलग रखा जाए। मामला आखिरकार सिर्फ परीक्षा रद्द होने का नहीं है। सवाल यह है कि झारखंड के युवाओं को सरकारी नौकरी की परीक्षा पर दोबारा भरोसा कैसे दिलाया जाए। पत्र में मुख्यमंत्री से कहा गया है कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो निष्पक्ष CBI जांच से पीछे हटने की जरूरत भी नहीं होनी चाहिए।
