सुकुरहुटू में करमा डाईर जतरा का आयोजन, जल-जमीन-जंगल और संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प

रांची
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द जन सभा डेस्क |  रांची

सुकुरहुटू ट्रांसपोर्ट नगर स्थित हथिया पत्थर के समीप करमा डाईर जतरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दक्षिणी पंचायत की मुखिया अनीता मुंडा ने की, जबकि मंच का संचालन मनेष महतो ने किया। कार्यक्रम में लोकहित अधिकार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हरिनाथ साहू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके अलावा प्रदेश महासचिव प्रमोद प्रसाद गुप्ता, पूर्व मुखिया रीना देवी मुंडा, वार्ड पार्षद आरती तिर्की, झारखंड प्रदेश तैलिक साहू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष महेश महतो, शिक्षाविद एवं समाजसेवी राज किशोर साहू समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजन के दौरान पारंपरिक संस्कृति, सामाजिक एकता और सामुदायिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरिनाथ साहू ने करमा डाईर जतरा के आयोजन के लिए समिति के सदस्यों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। उन्होंने कांके क्षेत्र में आदिवासी, सरना, भूईंहरी और सरकारी जमीनों की कथित अवैध खरीद-बिक्री का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में जमीन माफिया अधिकारियों से कथित सांठ-गांठ कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की बिक्री कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगी तो मूल आदिवासी परिवारों और उनकी आने वाली पीढ़ियों के सामने जमीन से जुड़े अधिकारों का संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, कार्यक्रम में लगाए गए इन आरोपों के संबंध में संबंधित अधिकारियों या दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हरिनाथ साहू ने कहा कि करमा डाईर जतरा जैसे आयोजनों को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इनके जरिए समाज में जल, जमीन, जंगल, प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने सामाजिक एकता और न्याय के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति की अध्यक्ष सह पंचायत मुखिया अनीता मुंडा, सचिव सोनी मुंडा, सरिता मुंडा, पंकज मुंडा, फागू मुंडा, पच्चू मुंडा, विकास मुंडा, विष्णु प्रजापति, दिनेश महतो, जलेश्वर प्रजापति, अनूप मुंडा, संदीप मुंडा, अमित मुंडा और तीर्थनाथ महतो सहित अन्य सदस्यों की भूमिका रही। आयोजन के दौरान स्थानीय लोगों और अतिथियों की मौजूदगी में करमा डाईर जतरा को सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता के संदेश के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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