लक्ष्मी नारायण मुंडा पर गिरफ्तारी की तलवार, पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के डर से फरार !

द जन सभा, रांची | आरती
रांची पुलिस मुख्यालय-1 में पदस्थापित डीएसपी अमर कुमार पांडेय के खिलाफ आदिवासी समन्वय समिति के लक्ष्मी नारायण मुंडा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिकायत किए जाने के बाद मामला चर्चा में है। समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा ने डीएसपी पर जमीन से जुड़े मामलों में कथित भूमिका, तबादले और अन्य आरोपों की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, डीएसपी अमर कुमार पांडेय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए शिकायतकर्ता लक्ष्मी नारायण मुंडा के खिलाफ दर्ज मामलों और बुकरु जमीन विवाद को इस पूरे घटनाक्रम की अहम कड़ी बताया है।
मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद बढ़ा विवाद
लक्ष्मी नारायण मुंडा की ओर से मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में डीएसपी अमर कुमार पांडेय के कार्यकाल और जमीन से जुड़े मामलों में उनकी कथित भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में अधिकारी के तबादले, जमीन मामलों और कथित मिलीभगत से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच विजिलेंस, सीआईडी या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
तबादले को लेकर भी शिकायत में सवाल
शिकायत में डीएसपी अमर कुमार पांडेय के तबादले का मुद्दा भी उठाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी 2025 में उन्हें सीनियर डीएसपी रैंक में पदोन्नति मिली थी। मई 2026 में डीएसपी स्तर के अधिकारियों के तबादले के दौरान उनका स्थानांतरण रांची पुलिस मुख्यालय-1 से झारखंड जगुआर किया गया था।शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में प्रभाव या पैरवी के कारण उनका तबादला रुक गया और वह रांची पुलिस मुख्यालय-1 में ही पदस्थापित रहे। हालांकि, यह शिकायतकर्ता की ओर से लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि का कोई आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है।
जमीन मामलों की जांच को लेकर भी आरोप
शिकायत में अगस्त 2025 में रांची के जमीन मामलों की जांच के लिए गठित एसआईटी का भी जिक्र किया गया है। शिकायतकर्ता ने एक जमीन मामले में डीएसपी अमर कुमार पांडेय की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, शिकायत से संबंधित रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि शिकायतकर्ता के पास इन आरोपों को साबित करने वाली कोई आधिकारिक चार्जशीट या विभागीय जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
डीएसपी अमर कुमार पांडेय ने शिकायतकर्ता पर उठाए सवाल
दूसरी ओर, डीएसपी अमर कुमार पांडेय ने शिकायतकर्ता लक्ष्मी नारायण मुंडा के आरोपों को अलग संदर्भ में देखने की बात कही है। उनका कहना है कि लक्ष्मी नारायण मुंडा खुद जमीन से जुड़े विवादों और मामलों में आरोपी रहे हैं और पुलिस कार्रवाई के बाद उनके द्वारा पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं। डीएसपी का पक्ष है कि बुकरु इलाके में जमीन को लेकर विवाद के दौरान पुलिस ने कथित कब्जे की कोशिश को रोकने की कार्रवाई की थी। उनके मुताबिक, इसी कार्रवाई के बाद उनके खिलाफ शिकायत और आरोपों का सिलसिला शुरू हुआ।
बुकरु जमीन विवाद बना पूरे मामले की अहम कड़ी
डीएसपी अमर कुमार पांडेय के अनुसार, बुकरु इलाके में लक्ष्मी नारायण मुंडा और एक अन्य व्यक्ति कृष्णा नायक से जुड़ा जमीन विवाद सामने आया था। पुलिस का आरोप है कि वहां जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा रही थी। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया और संबंधित लोगों से पूछताछ की। डीएसपी के मुताबिक, इसी कार्रवाई के बाद लक्ष्मी नारायण मुंडा ने पुलिस पर आरोप लगाना शुरू किया। हालांकि, इस पूरे विवाद में जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े वास्तविक तथ्यों का अंतिम निर्धारण राजस्व रिकॉर्ड और सक्षम कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
RIMS-2 जमीन विवाद में भी लक्ष्मी नारायण मुंडा का नाम
लक्ष्मी नारायण मुंडा का नाम कांके थाना क्षेत्र के नगड़ी में प्रस्तावित RIMS-2 परियोजना की जमीन को लेकर हुए विवाद में दर्ज प्राथमिकी में भी सामने आया था। अगस्त 2025 में पुलिस ने इस विवाद के बाद 85 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस सूची में लक्ष्मी नारायण मुंडा का नाम भी शामिल था। पुलिस के मुताबिक, RIMS-2 की जमीन पर निर्माण कार्य के विरोध के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद हुआ था। पुलिस ने इस मामले में सरकारी काम में बाधा और पुलिसकर्मियों पर हमले समेत कई आरोप लगाए थे। इस मामले में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
RIMS-2 विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
RIMS-2 परियोजना के लिए कांके के नगड़ी क्षेत्र में जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। ग्रामीणों के एक वर्ग ने जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर सवाल उठाए हैं। 2025 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की टीम ने भी कांके क्षेत्र में पहुंचकर ग्रामीणों से जमीन और मुआवजे से जुड़े मुद्दों पर जानकारी ली थी ।2026 में भी RIMS-2 की जमीन को लेकर ग्रामीणों का विरोध सामने आया। जुलाई 2026 में ग्रामीणों ने जमीन वापस करने और अधिग्रहण रद्द करने की मांग को लेकर लोकभवन का घेराव किया था।
क्या बुकरु विवाद और मुख्यमंत्री से शिकायत का कोई सीधा संबंध है?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। एक तरफ लक्ष्मी नारायण मुंडा ने डीएसपी अमर कुमार पांडेय के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरी तरफ डीएसपी का कहना है कि शिकायतकर्ता के खिलाफ पहले से चल रहे जमीन और RIMS-2 से जुड़े मामलों को भी पूरे घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि शिकायत केवल किसी कार्रवाई से बचने के लिए की गई है। इसके लिए पुलिस रिकॉर्ड, राजस्व दस्तावेज, प्राथमिकी, शिकायत पत्र और संबंधित पक्षों के बयानों की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होना बाकी
किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत या प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। इसी तरह किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत सामने आना भी उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है। इस मामले में भी लक्ष्मी नारायण मुंडा के आरोपों और डीएसपी अमर कुमार पांडेय के पक्ष दोनों को जांच के दायरे में रखना जरूरी होगा। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच होती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकता है कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
पुलिस की कार्रवाई और शिकायत के बीच उठ रहे सवाल
पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि पुलिस कार्रवाई और उसके बाद हुई शिकायत को किस तरह देखा जाए। अगर पुलिस के पास बुकरु जमीन विवाद या RIMS-2 मामले में कार्रवाई के पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य हैं, तो वे जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं, अगर शिकायतकर्ता के पास डीएसपी अमर कुमार पांडेय के खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित ठोस दस्तावेज हैं, तो जांच एजेंसी के सामने उन्हें रखना भी जरूरी होगा।
आरोपों का फैसला जांच से ही संभव
फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। लक्ष्मी नारायण मुंडा ने डीएसपी अमर कुमार पांडेय के खिलाफ मुख्यमंत्री से शिकायत कर जांच की मांग की है। वहीं डीएसपी अमर कुमार पांडेय ने शिकायतकर्ता के खिलाफ दर्ज मामलों और बुकरु तथा RIMS-2 से जुड़े विवादों को सामने रखा है। ऐसे में इस विवाद का निष्पक्ष निष्कर्ष आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच से ही निकल सकता है। जांच में यदि किसी पक्ष के खिलाफ आरोप सही पाए जाते हैं तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
