Jharkhand Terror Founding News: झारखंड टेरर फंडिंग मामला: NIA कोर्ट ने CCL के पूर्व जीएम अजीत ठाकुर को बरी किया, 14 आरोपी दोषी करार

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द जन सभा | डेस्क

झारखंड के चतरा जिले स्थित मगध और आम्रपाली कोयला खदानों से जुड़े बहुचर्चित टेरर फंडिंग मामले में रांची की विशेष एनआईए अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के तत्कालीन जनरल मैनेजर अजीत कुमार ठाकुर को सभी आरोपों से बरी कर दिया, जबकि प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी TPC के उग्रवादियों और सहयोगियों समेत 14 अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत अब 18 अगस्त 2026 को इन दोषियों की सजा की अवधि पर सुनवाई करेगी।

यह मामला महज रंगदारी का नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों, कारोबारियों और उग्रवादी संगठन के बीच एक बड़े संगठित नेटवर्क का था। इसकी शुरुआत 2016 में टंडवा पुलिस द्वारा स्थानीय शांति समिति के पास से करीब 1.49 करोड़ रुपये नकद बरामद करने से हुई थी। जांच में खुलासा हुआ कि यह समिति असल में टीपीसी के लिए लेवी वसूलने का काम करती थी। खदानों से कोयला उठाने वाले हर ट्रक से प्रति मीट्रिक टन 254 रुपये तक की तय वसूली की जाती थी, जो बाद में हथियार खरीदने और नक्सली गतिविधियों को बढ़ाने के काम आती थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए 2018 में जांच एनआईए को सौंपी गई, जिसके तहत टीपीसी कमांडर कमलेश गंझू के ठिकानों पर छापेमारी कर 36 लाख रुपये नकद, एके-47 और पिस्टल जैसे घातक हथियार भी जब्त किए गए थे। इस पूरे नेटवर्क में सीसीएल के तत्कालीन जीएम अजीत कुमार ठाकुर पर भी टीपीसी और ट्रांसपोर्टरों के साथ सांठगांठ कर वसूली को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद एनआईए कोर्ट ने पाया कि अजीत ठाकुर के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके, जिसके बाद उन्हें बरी कर दिया गया, वहीं विनोद कुमार गंझू, प्रदीप राम, मुनेश गंझू, बीरबल गंझू, गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ ब्रजेश गंझू, मुकेश गंझू उर्फ मुनेश्वर गंझू, कोहराम जी, आक्रमण जी उर्फ रविंदर गंझू, अनिश्चय गंझू, दीपु सिंह उर्फ भिखन, बिंदु गंझू उर्फ बिंदेश्वर गंझू, भिखन गंझू और संजय जैन  टेरर फंडिंग का आरोपी ठहराया गया।

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