
The Jan Sabha संवाददाता, रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता विनोद पांडेय ने केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि पिछले 11 वर्षों में देश की आम जनता को राहत देने के बजाय केवल संकट, महंगाई और असुरक्षा की खाई में धकेला गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में आम आदमी की स्थिति दयनीय हो गई है और सरकार जनहित को ताक पर रखकर केवल सत्ता के प्रचार-प्रसार में जुटी है।
विनोद पांडेय ने आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए कहा कि आज देश का मध्यम वर्ग, किसान, मजदूर, युवा और छोटे व्यापारी सभी जबरदस्त आर्थिक दबाव और अस्थिरता से जूझ रहे हैं। भाजपा सरकार की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं; सत्ता पक्ष केवल इवेंट मैनेजमेंट और बड़े उद्योगपतियों के हित साधने में व्यस्त है, जबकि जमीनी स्तर पर जनता की परेशानियां सुनने वाला कोई नहीं है।
केंद्र की पिछली गलतियों को रेखांकित करते हुए झामुमो नेता ने कहा कि नोटबंदी के दौरान देश की गरीब और ईमानदार जनता को घंटों बैंकों की कतारों में खड़ा किया गया। वहीं, कोविड काल में जब जनता अस्पताल, ऑक्सीजन और जीवन रक्षक दवाइयों के लिए त्राहिमाम कर रही थी, तब सरकार प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही। इन त्रासदियों के घाव आज भी जनता के मन में ताजा हैं।
महंगाई के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और खाद्य सामग्री की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आने के बावजूद जनता को इसका लाभ क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि तेल कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, जिससे स्पष्ट है कि सरकार की नीतियां केवल कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनी हैं।
विनोद पांडेय ने भाजपा की ‘दोहरी नीति’ पर प्रहार करते हुए कहा कि सरकार जनता को लगातार त्याग, बचत और राष्ट्रहित का उपदेश देती है। आम नागरिकों से कहा जाता है कि पेट्रोल कम खर्च करें और डॉलर बचाएं, लेकिन दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों के विदेशी निवेश और उन्हें दी जा रही विशेष आर्थिक सुविधाओं पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता। आम जनता पर राष्ट्रभक्ति का बोझ लादना और रसूखदारों को हर तरह की छूट देना लोकतंत्र के लिए घातक है।
झामुमो नेता ने निष्कर्ष के तौर पर कहा कि देश को वर्तमान में एक ऐसी सरकार की आवश्यकता है जो रोजगार सृजित करे और सामाजिक सौहार्द बनाए रखे। भाजपा ने बेरोजगारी, आर्थिक असमानता और विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है, न कि पूंजीपतियों के प्रति। जनता अब जाग चुकी है और आने वाले समय में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के माध्यम से भाजपा की इन नीतियों का करारा जवाब देगी।
