द जन सभा | डेस्क
रिनपास के मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा ने उन्हें जारी किए गए शोकॉज नोटिस का जवाब देते हुए प्रभारी निदेशक डॉ. ज्योति सिमलई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंगलवार को भेजे गए अपने जवाबी पत्र में उन्होंने दावा किया है कि उन्हें लंबे समय से मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

डॉ. सिद्धार्थ ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि उपलब्ध दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लिखा है कि बिना किसी गलती के उन्हें एक कर्मचारी के बजाय आरोपी की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम का असर उनकी कार्यक्षमता, मानसिक स्थिति और पेशेवर दायित्वों पर पड़ रहा है।
अपने जवाबी पत्र में डॉ. सिद्धार्थ ने यह भी दावा किया है कि संस्थान में उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। उनका आरोप है कि निष्पक्ष सुनवाई करने के बजाय लगातार उनके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने लिखा है कि इस कारण वह स्वयं को संस्थान में अकेला और असहाय महसूस कर रहे हैं।
डॉ. सिद्धार्थ ने आगे आरोप लगाया है कि उन्हें संस्थान में अलग-थलग करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों की छवि धूमिल करने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से माहौल बनाया जा रहा है। पत्र के अनुसार, वर्ष 2022 में वर्तमान प्रभारी निदेशक के पदभार संभालने के बाद से ऐसी परिस्थितियां लगातार बनी हुई हैं।
पत्र में डॉ. सिद्धार्थ ने लिखा है कि वह अब तक इसलिए मौन रहे क्योंकि उन्हें रिनपास एक प्रतिष्ठित और सम्मानित संस्थान लगता है। हालांकि, उनके अनुसार लगातार बदलती परिस्थितियों और बढ़ते मानसिक दबाव के कारण उन्हें अपनी बात लिखित रूप से रखने की आवश्यकता महसूस हुई।
डॉ. सिद्धार्थ ने अपने जवाबी पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि प्रभारी निदेशक के व्यवहार के कारण उन्हें लगातार मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि इसका सीधा असर उनके पेशेवर दायित्वों के निर्वहन और कार्यक्षमता पर पड़ रहा है।
अंग्रेजी में दिए गए अपने जवाब में डॉ. सिद्धार्थ ने यह भी दावा किया है कि उन्हें पूर्व में मौखिक और टेलीफोन के माध्यम से जान से मारने की धमकी मिली थी। उन्होंने लिखा है कि इसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग की थी तथा प्रशासन से इस संबंध में आधिकारिक जवाब देने का अनुरोध किया था।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी दावा किया है कि जिस बैठक में अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया गया, उसमें शामिल नहीं होने की मौखिक अनुमति उन्होंने पहले ही संबंधित अधिकारियों से ले ली थी। इसके बावजूद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसे उन्होंने अनुचित बताया है।
पत्र में डॉ. सिद्धार्थ ने यह भी उल्लेख किया है कि लगातार जारी किए जा रहे शोकॉज नोटिस और प्रशासनिक कार्रवाई के कारण वह मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई और लिखित जवाब देने का अनुरोध किया है।
इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि जब रिनपास के एक चिकित्सक ने अपने आधिकारिक जवाब में मानसिक एवं प्रशासनिक प्रताड़ना, सुरक्षा और कार्यस्थल के माहौल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, तब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और स्थानीय विधायक सुरेश बैठा की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनप्रतिनिधि इस मामले में संस्थान से जवाब मांगते हैं या निष्पक्ष जांच की पहल करते हैं।
Note: यह समाचार डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा द्वारा शोकॉज नोटिस के जवाब में लिखे गए पत्र में किए गए दावों और आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। समाचार प्रकाशित किए जाने तक प्रभारी निदेशक डॉ. ज्योति सिमलई अथवा रिनपास प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई थी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
